स्वतंत्र छत्तीसगढ़
रायपुर, छत्तीसगढ़
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप पर प्रसारित होने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर दी है। अब विद्यार्थियों की दोबारा परीक्षा नए प्रश्नपत्र के साथ आयोजित की जाएगी।
हेड लाइंस
परीक्षा से करीब दो घंटे पहले व्हाट्सऐप पर पहुंचा प्रश्नपत्र
विवाद के बाद बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर का एंटोमोलॉजी पेपर रद्द
नए प्रश्नपत्र के साथ दोबारा आयोजित होगी परीक्षा
मामले की जांच शुरू, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और एफआईआर की तैयारी
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी यानी कीट विज्ञान विषय की परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की तस्वीरें और सामग्री विद्यार्थियों के बीच व्हाट्सऐप पर प्रसारित होने की जानकारी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। अब इस विषय की परीक्षा नए प्रश्नपत्र के साथ दोबारा आयोजित की जाएगी।

परीक्षा से पहले वायरल हुआ प्रश्नपत्र : जानकारी के अनुसार परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले प्रश्नपत्र विद्यार्थियों के व्हाट्सऐप ग्रुप और अन्य माध्यमों तक पहुंच गया था। इसके बाद परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि वायरल प्रश्नपत्र और मुख्य परीक्षा के पेपर में काफी समानता पाई गई है। हालांकि प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा से पहले कैसे बाहर आया, इसकी जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
नए प्रश्नपत्र से फिर होगी परीक्षा : विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों के हित और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पेपर रद्द करने का फैसला लिया है। एंटोमोलॉजी विषय की दोबारा परीक्षा नए प्रश्नपत्र के साथ कराई जाएगी। पुनर्परीक्षा की तारीख और समय को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से अलग से आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी। इस फैसले से उन विद्यार्थियों के लिए दोबारा तैयारी की स्थिति बन गई है, जिन्होंने पहले आयोजित परीक्षा में हिस्सा लिया था।
जांच के दायरे में प्रश्नपत्र की पूरी प्रक्रिया : प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस स्तर और किस स्रोत से बाहर पहुंचा। पेपर तैयार करने, सुरक्षित रखने, गोपनीय तरीके से भेजने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रश्नपत्र किन लोगों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचा और इसे कितने लोगों ने आगे प्रसारित किया।
एफआईआर की तैयारी, जिम्मेदारों की होगी पहचान : विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी की है। पुलिस जांच के जरिए प्रश्नपत्र के कथित स्रोत से लेकर व्हाट्सऐप पर उसे प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जा सकती है। जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा की गोपनीयता में चूक कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। विश्वविद्यालय का कहना है कि परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जाएगा।
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