स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हेड लाइंस
• नगरदा वाटरफॉल में फिसलकर युवक की दर्दनाक मौत
• कोरबा के उरगा निवासी युवक दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने पहुंचा था
• बारिश के कारण चिकने पत्थरों पर फिसला पैर, सिर में गंभीर चोट बनी मौत की वजह
• एक सप्ताह में दूसरी मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
• प्रशासन ने पर्यटकों से बरसात में अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की
जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़। जांजगीर-चांपा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन एवं पिकनिक स्थल नगरदा वाटरफॉल में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। कोरबा जिले के उरगा निवासी एक युवक की झरने के पास फिसलकर गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि युवक अपने दोस्तों के साथ छुट्टी का आनंद लेने नगरदा वाटरफॉल पहुंचा था। बारिश के कारण झरने के आसपास मौजूद पत्थर अत्यधिक फिसलन भरे हो चुके थे। इसी दौरान युवक का संतुलन बिगड़ गया और वह सिर के बल पत्थरों पर गिर पड़ा। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और साथ आए दोस्तों सहित अन्य पर्यटकों में भी दहशत का माहौल बन गया।
पिकनिक का उत्साह पलभर में मातम में बदला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतक युवक कोरबा जिले के उरगा क्षेत्र का निवासी था। वह अपने दोस्तों के साथ मानसून के मौसम का आनंद लेने नगरदा वाटरफॉल पहुंचा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सभी लोग झरने के आसपास घूम रहे थे, तभी युवक चिकने पत्थरों पर चलते समय अचानक फिसल गया। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट लगी। साथ मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।
पुलिस ने शुरू की जांच, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण बारिश के कारण पत्थरों पर अत्यधिक फिसलन माना जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
एक सप्ताह में दूसरी मौत से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नगरदा वाटरफॉल में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी मौत है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों में चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रहे हादसों ने इस लोकप्रिय पर्यटन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के मौसम में हजारों लोग यहां घूमने पहुंचते हैं, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था का अभाव दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहा है। लोगों का मानना है कि यदि जोखिम वाले क्षेत्रों को समय रहते प्रतिबंधित किया जाए और पर्यटकों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाए तो ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
मानसून के दौरान वाटरफॉल और नदी-नालों के आसपास पत्थरों पर काई जम जाने से वे बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं। ऐसे स्थानों पर थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद कई पर्यटक बेहतर फोटो और वीडियो बनाने या झरने के अधिक करीब जाने के प्रयास में खतरा मोल ले लेते हैं। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में जलप्रपातों के किनारे निर्धारित सुरक्षा सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए और किसी भी तरह का जोखिम उठाने से बचना चाहिए।
प्रशासन ने जारी की सावधानी की अपील
घटना के बाद प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान वाटरफॉल, नदी और अन्य जल स्रोतों के आसपास विशेष सावधानी बरतें। चिकने पत्थरों पर चढ़ने या किनारों तक जाने से बचें, सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और सेल्फी या वीडियो बनाने के लिए जोखिम वाले स्थानों पर न जाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की उठी मांग
लगातार सामने आ रहे हादसों के बाद स्थानीय लोगों ने नगरदा वाटरफॉल में स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, सीसीटीवी कैमरे, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और मानसून सीजन में अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में भी इस तरह की दर्दनाक घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
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