GST विभाग की 2022 की विभागीय परीक्षा निरस्त, चयनित कर्मचारियों को मूल पद पर लौटने का आदेश|
हेडलाइंस
- 2022 में हुई सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा को राज्य कर विभाग ने शून्य घोषित कर निरस्त किया।
- परीक्षा के आधार पर वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने 42 कर्मचारियों की नियुक्तियां भी रद्द की गईं।
- विभागीय जांच में आरक्षण रोस्टर, उपस्थिति पंजी, अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग और पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया।
- डिप्टी CM अरुण साव ने कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ा, जबकि PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई और देरी पर सवाल उठाए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य कर (GST) विभाग में वर्ष 2022 में लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा को निरस्त किए जाने के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने 11 सितंबर 2026 को जारी आदेश में परीक्षा को शून्य घोषित करते हुए उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों को भी निरस्त कर दिया। परीक्षा के जरिए चयनित 42 कर्मचारियों को उनके मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस लौटना होगा।
विभागीय जांच में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार आरक्षण रोस्टर, उपस्थिति पंजी, अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग और पुनर्मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड में खामियां सामने आईं। कुछ चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर मिलने की बात भी सामने आई। जांच समिति ने 3 जुलाई 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसके बाद विभाग ने पूरी परीक्षा और उससे संबंधित चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का फैसला लिया।
अरुण साव बोले- जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां होगी कार्रवाई
डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने परीक्षा निरस्त किए जाने के फैसले को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ते हुए कहा कि जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं और लोगों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साव ने इस मामले को पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए युवाओं के साथ अन्याय और राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।
दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा को शून्य घोषित करना या जांच करना सरकार का निर्णय है। उन्होंने कहा कि यदि प्रमोशन में गड़बड़ी हुई है तो सरकार जांच कर सकती है। बैज ने इस मुद्दे को CGPSC से जुड़े विवादों से जोड़ते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि सरकार को जांच करनी है तो करे, उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनके मुताबिक सरकार ने इस मामले में लंबे समय तक कार्रवाई नहीं की।
क्या हुआ आगे?
विभाग के आदेश के अनुसार परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्ति आदेश निरस्त होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों को उनके पूर्व मूल पद पर लौटना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर बताया गया है; इन निष्कर्षों पर प्रभावित पक्ष की ओर से आगे कानूनी चुनौती की स्थिति अलग विषय हो सकती है।
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