स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हेड लाइंस
• नारायणपुर के अबूझमाड़ में बाढ़ से 16 मकान पूरी तरह ध्वस्त
• पालतू जानवर, जरूरी सामान और दस्तावेज पानी में बहे
• पीएम जनमन योजना से मिली सहायता भी बाढ़ की चपेट में आई
• ग्रामीणों ने राहत नहीं मिलने का लगाया आरोप
• 30 जुलाई की बारिश में दो बच्चियों की भी हुई थी मौत
नारायणपुर, छत्तीसगढ़: नारायणपुर जिले के संवेदनशील और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर मेटानार ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कादेर में पानी का तेज बहाव कई परिवारों के लिए जीवनभर की कमाई बहा ले गया। बाढ़ की चपेट में आने से 16 मकान पूरी तरह धराशायी हो गए हैं, जिससे दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों के सामने अब भोजन, आश्रय और रोजमर्रा की आवश्यकताओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ में बह गए मवेशी, सामान और जरूरी दस्तावेज
ग्रामीणों के अनुसार अचानक आई बाढ़ ने केवल उनके घर ही नहीं उजाड़े, बल्कि घरेलू उपयोग का सामान, अनाज, कपड़े, महत्वपूर्ण दस्तावेज, वर्षों की जमा पूंजी और पालतू जानवरों को भी अपने साथ बहा ले गई। कई परिवारों का कहना है कि अब उनके पास जीवनयापन के लिए आवश्यक संसाधन तक नहीं बचे हैं। मजबूरी में वे आसपास के गांवों और परिचितों से उधार लेकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के कई घंटे बाद तक न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचा और न ही राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। हालांकि कुछ ग्रामीणों को पड़ोसी गांव बुलाया गया है, लेकिन उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस उद्देश्य से बुलाया गया है।
पीएम जनमन योजना की सहायता भी हुई बर्बाद
ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र सरकार की पीएम जनमन योजना के तहत उन्हें जो सहायता मिली थी, वह भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गई। इससे पहले से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। लोगों का कहना है कि अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे और दोबारा अपने घर कैसे बसाएंगे। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत, खाद्यान्न, अस्थायी आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
30 जुलाई की बारिश ने भी मचाई थी तबाही
अबूझमाड़ क्षेत्र पिछले कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से प्रभावित है। 30 जुलाई को हुई भारी वर्षा के दौरान उफनते नदी-नालों ने कई संपर्क मार्गों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। कई मकान और मवेशी बह गए थे, जबकि दो मासूम बच्चियों की नदी के तेज बहाव में बहने से दर्दनाक मौत हो गई थी। लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र में जनजीवन अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। प्रशासन के सामने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशासनिक राहत का इंतजार
आपदा से प्रभावित ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र ही मौके पर पहुंचकर नुकसान का सर्वे करेगा और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि, खाद्यान्न, अस्थायी आवास तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर सहायता नहीं मिलने पर उनकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल पूरा क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका से उबरने का प्रयास कर रहा है और प्रभावित परिवार सरकार से त्वरित मदद की आस लगाए बैठे हैं।
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