रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• 4 से 6 मई तक बूढ़ातालाब में राज्य स्तरीय स्पर्धा
• राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए होगा खिलाड़ियों का चयन
• प्रैक्टिस नौकाओं को नुकसान पहुंचा रहे असामाजिक तत्व
• नई नौकाएं मंगाने की तैयारी में एसोसिएशन
रायपुर। राजधानी के बूढ़ातालाब में 4 से 6 मई तक राज्य स्तरीय कयाकिंग-केनोइंग (नौकायन) स्पर्धा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के मुकाबले आयोजित होंगे। इस प्रतियोगिता के आधार पर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का चयन आगामी राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए किया जाएगा, जो 8 जून से नवा रायपुर स्टेडियम के पास स्थित सेंध जलाशय में आयोजित होगी। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देशभर से खिलाड़ी भाग लेंगे, जिससे रायपुर खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
प्रतियोगिता की तैयारियां और श्रेणियां
आयोजन समिति के अनुसार, प्रतियोगिता में के-1, के-2, के-4, सी-1, सी-2 और सी-4 जैसी विभिन्न श्रेणियों में मुकाबले होंगे। इसमें भाग लेने के लिए खिलाड़ियों का पंजीयन अनिवार्य रखा गया है और सभी प्रतियोगिताएं फेडरेशन के निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न होंगी। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच है, बल्कि राज्य के खेल स्तर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
सुरक्षा और संसाधनों की चुनौती
हालांकि प्रतियोगिता के बीच खिलाड़ियों को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, अभ्यास के लिए उपयोग में लाई जाने वाली महंगी नौकाओं को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पहले ये नौकाएं आउटडोर स्टेडियम के एक हॉल में रखी जाती थीं, लेकिन अब वहां से हटाए जाने के बाद खिलाड़ियों को उन्हें तालाब किनारे ही छोड़ना पड़ रहा है। नतीजतन, असामाजिक तत्व इन नावों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों और आयोजकों की चिंता बढ़ गई है।
बाहरी सहायता पर बढ़ती निर्भरता
नौकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण एसोसिएशन को अब जगदलपुर स्थित एकेडमी से अतिरिक्त नौकाएं मंगानी पड़ रही हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रशांत सिंह रघुवंशी के मुताबिक, जूनियर और सब-जूनियर नेशनल स्पर्धा को देखते हुए नई नौकाओं की भी व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ऑल इंडिया फेडरेशन से संपर्क में हैं। यह स्थिति खेल अधोसंरचना की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर करती है।
खेल विकास पर असर और उम्मीदें
इस पूरी परिस्थिति ने राज्य में खेल सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर बड़े स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों को बुनियादी सुरक्षा और संसाधनों के लिए जूझना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और राज्य की खेल छवि पर पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस प्रतियोगिता और आगामी राष्ट्रीय स्पर्धा पर टिकी हैं, जहां से छत्तीसगढ़ के उभरते खिलाड़ियों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
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