स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
1 मई से 30 मई तक चलेगा पहला चरण • ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ में जुटेगी विस्तृत जानकारी • 16–30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा • हर मकान की होगी जियो-टैगिंग • डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
1 मई से शुरू होगा घर-घर सर्वे, हर परिवार का बनेगा रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत 1 मई 2026 से होने जा रही है, जो 30 मई तक चलेगा। इस चरण में ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करेंगे और प्रत्येक मकान की स्थिति, उपयोग और उसमें रहने वाले परिवारों का पूरा विवरण तैयार करेंगे। यह प्रक्रिया आने वाले वर्षों की सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की आधारशिला मानी जा रही है।
डिजिटल जनगणना की शुरुआत, खुद भी भर सकेंगे जानकारी
इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल रूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच नागरिकों को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ की सुविधा दी गई है, जिसके तहत लोग ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपने घर और परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन जानकारी भरने के बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में सर्वे के लिए आने वाले कर्मचारियों को दिखाना अनिवार्य होगा। इस पहल से समय की बचत के साथ-साथ डेटा की सटीकता भी बढ़ने की उम्मीद है।
33 सवालों में घर की पूरी तस्वीर, सुविधाओं का भी आकलन
जनगणना के इस चरण में कुल 33 महत्वपूर्ण सवालों के जरिए घर और परिवार की विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें मकान की स्थिति (कच्चा या पक्का), उपयोग (रहवासी या व्यावसायिक), परिवारों की संख्या और अन्य बुनियादी पहलुओं को शामिल किया गया है। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी और रेडियो जैसी सुविधाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया जाएगा। इसके अलावा घर में रहने वाले लोगों की संख्या और उपयोग में आने वाले वाहनों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
हर घर बनेगा ‘डिजिटल डॉट’, विकास योजनाओं को मिलेगा आधार
इस बार जनगणना के दौरान हर मकान की जियो-टैगिंग कर उसे डिजिटल मैप पर दर्ज किया जाएगा, जिससे हर घर एक ‘डिजिटल डॉट’ के रूप में सामने आएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा आपदा प्रबंधन में होगा, जहां राहत और बचाव कार्यों को तेज और सटीक बनाया जा सकेगा। इसके अलावा विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन, शहरी विकास की बेहतर योजना, सड़क, स्कूल और अस्पतालों के निर्माण में सटीक डेटा मददगार साबित होगा। साथ ही पलायन और शहरीकरण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने में भी यह डेटा उपयोगी रहेगा।
गोपनीयता और निगरानी पर विशेष जोर, लोगों से सहयोग की अपील
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल नीतिगत फैसलों और योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा। प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे, जहां से पूरे सर्वे की मॉनिटरिंग होगी। साथ ही शिकायतों के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध रहेगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत पहचान पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी दें और सही व सटीक विवरण साझा कर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सहयोग करें।
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