स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क
मुख्य बिंदु (हाइलाइट बॉक्स):
- महिला को ‘टोनही’ बताकर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न
- गाली-गलौज और मारपीट से पीड़िता घायल
- पुलिस ने मां-बेटे को किया गिरफ्तार
- टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत मामला दर्ज
- समाज में अब भी जारी अंधविश्वास पर गंभीर सवाल
अंधविश्वास की जड़ें अब भी मजबूत
तखतपुर : तखतपुर क्षेत्र में एक बार फिर अंधविश्वास के नाम पर महिला उत्पीड़न का मामला सामने आया है। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के प्रमुख डॉक्टर दिनेश मिश्रा द्वारा लगातार जागरूकता के बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में ‘टोनही’ जैसी भ्रांतियां अब भी जीवित हैं। यह न केवल सामाजिक पिछड़ेपन को दर्शाता है, बल्कि महिलाओं के सम्मान पर सीधा आघात भी है।
ग्राम ढनढन में महिला से बर्बर व्यवहार
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले के ग्राम ढनढन की एक महिला को ‘टोनही’ कहकर प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि आरोपियों ने महिला के साथ गाली-गलौज करते हुए जमकर मारपीट की, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। लगातार हो रहे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से महिला बेहद परेशान हो चुकी थी।
शिकायत के बाद पुलिस हरकत में
पीड़िता ने 5 अप्रैल को तखतपुर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि महिला को लंबे समय से ‘टोनही’ कहकर अपमानित किया जा रहा था और उसे धमकाया भी जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और साक्ष्य एकत्र किए।
कानूनी शिकंजा: मां-बेटे गिरफ्तार
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के साथ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत मामला दर्ज किया। तत्पश्चात आरोपी देवेन्द्र बघेल और सुमित्रा बाई बघेल को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। यह कार्रवाई थाना प्रभारी विवेक कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में की गई।
पुलिस की अपील और सामाजिक संदेश
पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अंधविश्वास के नाम पर किसी भी महिला के साथ दुर्व्यवहार करना कानूनन अपराध है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे कृत्यों से दूर रहें और समाज में जागरूकता फैलाएं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक दौर में भी अंधविश्वास किस हद तक महिलाओं की गरिमा को प्रभावित कर रहा है।
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