स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क:
नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026। वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस कदम से तेल कंपनियों को झटका लगा है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यह वृद्धि काफी बड़ी मानी जा रही है और इसका सीधा असर डीजल निर्यात करने वाली कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जबकि पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य ही रखी गई है।
इस फैसले के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ा है। ऐसे में निर्यात महंगा कर सरकार डीजल को देश के भीतर ही बनाए रखना चाहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से तेल कंपनियों के निर्यात में कमी आ सकती है और उनके रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन घरेलू बाजार में डीजल की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही सरकार को इससे अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। हालांकि, निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा आय पर कुछ असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, यह फैसला सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वैश्विक संकट के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता को राहत देने पर फोकस किया जा रहा है।
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