स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क /रायपुर
हाइलाइट
- 69 प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास
- शंकर नगर स्थित क्रिस्टल ऑर्केड के सामने होगा व्यवस्थापन
- जल्द जारी होगा डिमांड नोट, निर्माण कार्य में तेजी की तैयारी
- 2017 में हटाई गई दुकानों के बाद लंबे समय से चल रहा था विवाद
पुनर्वास का फैसला: वर्षों के संघर्ष को मिला परिणाम
रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा में ऑक्सीजोन परियोजना के चलते हटाए गए 69 दुकानदारों के पुनर्वास का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इन दुकानदारों को अब शंकर नगर स्थित क्रिस्टल ऑर्केड के सामने व्यवस्थित किया जाएगा। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने इसे प्रभावित परिवारों के लिए “वनवास समाप्त होने” जैसा बताया और कहा कि वर्षों से रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को अब उनका अधिकार मिलने जा रहा है। नगर निगम जल्द ही डिमांड नोट जारी करेगा, जिससे दुकानों के निर्माण कार्य में देरी न हो।
सदन में उठे सवाल: देरी और योजना पर बहस
इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा पार्षद राजेश गुप्ता और कांग्रेस पार्षद श्रीमती अर्जुमन ढेबर ने पुनर्वास में हुई देरी को लेकर सवाल उठाए। एमआईसी सदस्य (राजस्व) अवतार बागल ने स्पष्ट किया कि 69 में से 55 दुकानदार जैसे ही निर्माण लागत जमा करेंगे, टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वहीं, नगर निवेश विभाग के एमआईसी सदस्य मनोज वर्मा ने कहा कि परिषद ने दुकानदारों की सभी मांगों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व कार्यकाल में दुकानों को जमीन से ऊपर बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन अब व्यावहारिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
विरोध और जवाब: कॉम्पलेक्स योजना पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने 26 दिसंबर 2017 को दुकानों को हटाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जिस खसरा नंबर पर पुनर्वास होना है, वहीं नगर निगम कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स की योजना कैसे बना रहा है। इस पर सभापति सूर्यकांत राठौर ने जवाब दिया कि कॉम्पलेक्स निर्माण के लिए शासन से नियमानुसार पत्राचार किया गया है और इसमें कोई बाधा नहीं है। महापौर मीनल चौबे ने अंत में कहा कि यह निर्णय न सिर्फ रोजगार लौटाने का प्रयास है, बल्कि प्रभावित दुकानदारों के सम्मान को भी पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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