सम्पादकीय
कभी पंजाब की राजनीति का केंद्र, अब पार्टी के निशाने पर
राघव चड्ढा, जो 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब अभियान का चेहरा थे, आज उसी पार्टी के भीतर विवादों में घिरे हैं। राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने और बोलने का समय सीमित किए जाने के बाद चड्ढा ने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में जनहित के मुद्दों को उठाने की बात कही और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे “दरिया” हैं जो सैलाब बन सकते हैं। यह बयान साफ संकेत देता है कि मामला सिर्फ पद का नहीं, बल्कि अंदरूनी असहमति का है।
2022 में ‘सुपर CM’ की छवि, पंजाब में मजबूत पकड़
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में चड्ढा का प्रभाव इतना मजबूत था कि उन्हें पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाला तक कहा गया। भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार में भी उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी। विरोधियों ने उन्हें “सुपर CM” तक कहा, जबकि राहुल गांधी ने ‘RC’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए रिमोट कंट्रोल वाली सरकार का आरोप लगाया। टिकट वितरण से लेकर चुनाव रणनीति तक, हर स्तर पर चड्ढा की पकड़ थी, जिसने AAP को 117 में से 92 सीटों की ऐतिहासिक जीत दिलाने में मदद की।
2024 के बाद रिश्तों में दरार की शुरुआत
टकराव की असली शुरुआत 2024 में मानी जा रही है, जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी सड़क पर थी, लेकिन चड्ढा नजर नहीं आए। इसे लेकर पार्टी के अंदर सवाल उठे। हालांकि उन्होंने अपनी गैरमौजूदगी की वजह आंखों की सर्जरी और विदेश दौरा बताया, लेकिन इससे बनी दूरी खत्म नहीं हुई। इसके बाद पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे।
पार्टी लाइन से अलग रुख बना विवाद की वजह
2025 में संगठनात्मक बदलाव के बाद स्थिति और बिगड़ी। पंजाब की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया को मिलने और चड्ढा का प्रभाव कम होने के बाद उन्होंने संसद में स्वतंत्र रुख अपनाना शुरू किया। AAP नेताओं का आरोप है कि वे पार्टी के तय एजेंडे से हटकर बोल रहे थे और कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों में भी सहयोग नहीं किया। सौरभ भारद्वाज और अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस पर नाराजगी जताई।
आगे क्या? संकेत सियासी खेमेबंदी के
वर्तमान घटनाक्रम यह संकेत देता है कि AAP के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। चड्ढा का आक्रामक रुख और पार्टी की सख्ती, दोनों मिलकर आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं। फिलहाल न तो चड्ढा और न ही पार्टी ने पूरी तरह खुलकर स्थिति स्पष्ट की है, लेकिन बयानबाजी यह साफ कर रही है कि यह विवाद जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।


