बिलासपुर/छत्तीसगढ़
हाईलाइट बॉक्स :
बिलासपुर में एक वकील को विदेशी निवेश के नाम पर 103 करोड़ के फर्जी डिमांड ड्राफ्ट का झांसा देकर करीब 3 करोड़ रुपए ठग लिए गए। आरोपी बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी ईमेल और पहचान के जरिए लंबे समय तक पीड़ित को गुमराह करता रहा। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है।
विदेशी निवेश के सपने दिखाकर रची गई ठगी की साजिश
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां वकील अरुण मिश्रा को कैंसर अस्पताल, ब्लाइंड इंस्टीट्यूट और लॉ कॉलेज खोलने के नाम पर करोड़ों रुपए के निवेश का लालच दिया गया। जनवरी-फरवरी 2024 में एक विदेशी नंबर से आए व्हाट्सएप मैसेज के जरिए आरोपी ने खुद को ब्रिटेन का डॉक्टर बताया और बाद में कथित सहयोगी ‘ग्रेस डेविड’ से संपर्क करवाया। निवेश के नाम पर करीब 500 करोड़ रुपए की योजना बताई गई, जिससे प्रभावित होकर पीड़ित ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई और लगातार संपर्क में रहा।
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डिमांड ड्राफ्ट क्लियरेंस के नाम पर वसूले गए करोड़ों रुपए
जून 2024 में आरोपी ने 103 करोड़ रुपए के डिमांड ड्राफ्ट के क्लियरेंस का झांसा दिया और अलग-अलग बहानों से पैसे मांगने शुरू कर दिए। होटल खर्च, प्रोसेसिंग फीस, एंबेसी, बैंक, आरबीआई और कस्टम कार्रवाई का हवाला देकर धीरे-धीरे बड़ी रकम वसूली गई। 31 जुलाई 2024 तक पीड़ित ने पहले छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन किए, फिर आरोपी नवीन जून के खाते में किस्तों में कुल 3 करोड़ 13 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। लंबे समय तक ड्राफ्ट क्लियर न होने पर संदेह हुआ और जांच में ठगी का खुलासा हुआ।
बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग, आरोपी गिरफ्तार
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नवीन जून, जो पहले बैंक से जुड़ा रहा था, ने अपनी बैंकिंग जानकारी और तकनीकी समझ का गलत इस्तेमाल किया। उसने फर्जी ईमेल आईडी बनाकर खुद को बैंक और एंबेसी अधिकारी बताकर पीड़ित को भरोसे में लिया। आरोपी सोनीपत (हरियाणा) का निवासी है और बिलासपुर में रह रहा था। उसके पास से थार और वेन्यू कार, मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप जब्त किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस संगठित ठगी में अन्य लोगों की संलिप्तता भी हो सकती है और मामले की गहराई से जांच जारी है।


