रायपुर/छत्तीसगढ़
हाईलाइट बॉक्स:
खरीफ सीजन से पहले खाद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि समय रहते उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि खेती प्रभावित न हो। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं, कांग्रेस ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई है।
किसानों की चिंता: “पिछली गलती न दोहराए सरकार”
अंतरराष्ट्रीय हालात और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच किसानों की चिंता एक बार फिर सामने आई है। किसान नेता तेजराम विद्रोही ने सरकार से मांग की है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सरकार को पहले से अंदाजा होता है कि कितने रकबे में खेती होगी, ऐसे में उसी हिसाब से खाद का स्टॉक तैयार रखना जरूरी है। उन्होंने पिछली बार रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई खाद की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति दोहराई नहीं जानी चाहिए।
विपक्ष का हमला: “जमीनी तैयारी नहीं, सिर्फ बयानबाजी”
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरते हुए श्वेतपत्र जारी करने की मांग उठाई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर सरकार केवल बयानबाजी कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही। उन्होंने पिछले खरीफ सीजन का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले शुरुआती दो महीनों में केवल 80 हजार मीट्रिक टन उर्वरक ही उपलब्ध कराया गया था। इस कमी के कारण किसान यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए दर-दर भटकते रहे।
कालाबाजारी का खतरा: किसानों पर बढ़ सकता है बोझ
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली बार कमी का फायदा उठाकर बिचौलियों ने खाद की कालाबाजारी की, जिससे किसानों को तीन से चार गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ी। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी ऐसी स्थिति बनती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। कांग्रेस ने कृषि मंत्री से इस साल की कुल मांग, मौजूदा स्टॉक और वितरण योजना पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। साथ ही पारदर्शिता के लिए श्वेतपत्र जारी करने पर जोर दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके और भरोसा कायम रहे।


