स्वतंत्र छत्तीसगढ़
मुख्य बिंदु
• Marco Rubio G7 बैठक के लिए फ्रांस पहुंचे
• S. Jaishankar से भी हुई अहम मुलाकात
• ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “समय-सीमा से आगे” बताया
• होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संभावित खतरे की चेतावनी
फ्रांस में कूटनीतिक हलचल तेज
फ्रांस में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान Marco Rubio ने वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। राजदूत गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए इसे सहयोग और साझेदारी के लिहाज से अहम बताया।
ईरान पर अमेरिकी रणनीति स्पष्ट
बैठक में Marco Rubio ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा अमेरिकी सैन्य अभियान तय समय-सीमा के अनुसार या उससे भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के प्रमुख लक्ष्य—ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल-ड्रोन निर्माण क्षमता को कमजोर करना—कुछ हफ्तों में हासिल किए जा सकते हैं। उनके अनुसार, यह रणनीति पहले से तय योजना के तहत लागू की जा रही है।
बिना ग्राउंड ट्रूप्स के ऑपरेशन
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान में जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। उनका कहना है कि आधुनिक सैन्य तकनीक के जरिए बिना ग्राउंड ऑपरेशन के ही महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इसे एक “सटीक और सीमित” मिशन बताते हुए कहा कि प्रगति लगातार सकारात्मक दिशा में है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
Marco Rubio ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी गंभीर चिंता जताई, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। उन्होंने आशंका जताई कि ईरान इस क्षेत्र में टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे अमेरिका ने “अवैध” और “दुनिया के लिए खतरनाक” करार दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव
G7 बैठक के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव को उजागर किया है। अमेरिका के कड़े रुख और ईरान को लेकर दिए गए संकेतों से आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। भारत समेत अन्य देशों की भूमिका भी इस परिदृश्य में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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