वाशिंगटन / देश-विदेश
मुख्य बिंदु
- अमेरिकी रक्षा विभाग ने अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की फंडिंग मांगी
- रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बयान—“बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे चाहिए”
- डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक चुनौती
- कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य, विरोध के संकेत
- लंबी अवधि के युद्ध की संभावनाओं पर चर्चा तेज
फंडिंग संकट और पेंटागन की बड़ी मांग
वॉशिंगटन से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को बनाए रखने के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव पेंटागन द्वारा व्हाइट हाउस को भेजा गया है और फिलहाल अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। यह रकम बेहद बड़ी मानी जा रही है, जिससे अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की मांग केवल अल्पकालिक ऑपरेशन के लिए नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति की ओर संकेत करती है।
“हम जीत रहे हैं” — हेगसेथ का बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस रकम की सीधी पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि युद्ध में सफलता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होती है। उनका बयान—“बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है”—काफी चर्चा में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध में “समय से आगे” चल रहा है और जीत की ओर बढ़ रहा है। साथ ही, उन्होंने उन आशंकाओं को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि अमेरिका किसी नए ‘दलदल’ में फंस सकता है।
ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक परीक्षा
यह प्रस्ताव अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकता है। हालांकि रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण है, लेकिन सभी सांसद इतने बड़े रक्षा खर्च के पक्ष में नहीं हैं। खासकर कुछ रूढ़िवादी नेता सरकारी खर्च को लेकर सख्त रुख रखते हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स भी इस प्रस्ताव का विरोध कर सकते हैं। ऐसे में इस फंडिंग को मंजूरी मिलना आसान नहीं दिख रहा है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या लंबी जंग की तैयारी है?
कांग्रेस के बजट ऑफिस के अनुसार, यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो यह कोविड-19 राहत पैकेज के बाद सबसे बड़ा अतिरिक्त खर्च बिल हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक लंबी और रणनीतिक लड़ाई की तैयारी कर रहा है। यह स्थिति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्होंने पहले ही इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों की आलोचना की थी। अब वही परिस्थिति दोहराने का खतरा उनके सामने खड़ा दिखाई दे रहा है।
वैश्विक असर और भविष्य की दिशा
इस संभावित फंडिंग और युद्ध के विस्तार का असर केवल अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और व्हाइट हाउस का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि यह संघर्ष सीमित रहेगा या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
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