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घरेलू उड़ानों पर बढ़ा फ्यूल सरचार्ज: 12 मार्च से एयर इंडिया टिकट पर ₹399 अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बढ़ेगा शुल्क…

नई दिल्ली / भारत

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी एटीएफ कीमतें

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। इसी के चलते Air India और Air India Express ने 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के टिकट पर ₹399 का ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लगाने की घोषणा की है। एयरलाइन समूह के बयान के अनुसार जेट ईंधन यानी एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में हालिया तेजी के कारण यह फैसला लेना आवश्यक हो गया है। यह सरचार्ज नई टिकट बुकिंग पर लागू होगा।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बढ़ेगा अतिरिक्त शुल्क

एयरलाइन समूह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी फ्यूल सरचार्ज में वृद्धि की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत पश्चिम एशिया के लिए उड़ानों पर 10 डॉलर, अफ्रीका के लिए 90 डॉलर और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए 60 डॉलर अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। इस बदलाव के तहत सिंगापुर की उड़ानें भी शामिल होंगी, जहां अभी तक कोई फ्यूल सरचार्ज नहीं लिया जाता था। एयरलाइन के अनुसार यह नई प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

एटीएफ महंगा होने से बढ़ा संचालन लागत का दबाव

एयरलाइन कंपनियों के अनुसार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) किसी भी एयरलाइन की कुल संचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। हाल के समय में आपूर्ति में बाधा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण इसकी कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। भारत में दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ATF पर अधिक एक्साइज ड्यूटी और वैट भी एयरलाइनों की लागत को और बढ़ा देते हैं, जिससे विमानन कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

पुराने टिकटों पर नहीं लगेगा नया सरचार्ज

एयर इंडिया समूह ने स्पष्ट किया है कि 12 मार्च से पहले जारी किए गए टिकटों पर नया फ्यूल सरचार्ज लागू नहीं होगा। हालांकि यदि यात्री अपनी यात्रा की तारीख या यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करते हैं और किराए का पुनर्गणना होता है, तब यह सरचार्ज लागू किया जा सकता है। फिलहाल अन्य प्रमुख भारतीय एयरलाइंस जैसे IndiGo, SpiceJet और Akasa Air ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

विमानन उद्योग पर बढ़ता आर्थिक दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो अन्य एयरलाइंस भी जल्द ही इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। इससे यात्रियों के लिए हवाई यात्रा थोड़ी महंगी हो सकती है। विमानन क्षेत्र में लागत और किराए के बीच संतुलन बनाए रखना एयरलाइनों के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है।

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