रायपुर / छत्तीसगढ़ /crime
जांच में नया मोड़, 1200 पेज का पूरक चालान अदालत में पेश
रायपुर में बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले की जांच में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब EOW-ACB ने मामले में 1200 पेज का पूरक चालान अदालत में पेश किया। इस घोटाले के कई आरोपी फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। इससे पहले जुलाई 2024 में इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ पहला चालान पेश किया गया था। इसमें सौम्या चौरसिया, रानू साहू, समीर बिश्नोई, शिव शंकर नाग, संदीप कुमार नायक, सूर्यकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, लक्ष्मीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, पारेख कुर्रे, राहुल सिंह, रोशन कुमार सिंह और वीरेंद्र जायसवाल शामिल थे। इसके बाद अक्टूबर 2024 में मनीष उपाध्याय और रजनीकांत तिवारी के खिलाफ, अक्टूबर 2025 में देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी के खिलाफ तथा दिसंबर 2025 में जयचंद कोसले के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया था।
कोल लेवी स्कैम की कार्यप्रणाली, शेल कंपनियों से होती थी रकम की लेयरिंग
EOW-ACB की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कोयला लेवी की अवैध वसूली अधिकतर नकद में की जाती थी। जिन लोगों के पास नकद भुगतान की सुविधा नहीं होती थी, उनके लिए मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी ने कथित तौर पर कई शेल कंपनियों की व्यवस्था कर रखी थी। इन शेल फर्मों और बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध राशि को वैध दिखाने के लिए किया जाता था। जांच के अनुसार कम से कम 40 करोड़ रुपये की रकम को विभिन्न बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रूटिंग और लेयरिंग कर नकद में परिवर्तित किया गया और अंततः यह राशि सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी बिलिंग, विभिन्न व्यावसायिक मदों के नाम पर भुगतान और कई खातों में धन स्थानांतरण के जरिए वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया।
अन्य मामलों से भी जुड़े आरोपी, कई फर्मों के जरिए अवैध लेनदेन
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी राकेश जैन के खिलाफ रायपुर पुलिस में तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से एक में चालान पेश किया जा चुका है जबकि दो मामले अभी विचाराधीन हैं। इसके अलावा EOW-ACB द्वारा जांच किए जा रहे शराब घोटाला मामले में भी आरोपी पर अनवर ढेबर से जुड़े व्यक्तियों और विभिन्न फर्मों को अपनी कथित अवैध नेटवर्क के माध्यम से बैंक एंट्री देने और धन की लेयरिंग में सहयोग करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कंपनियों से बड़ी मात्रा में धनराशि कई फर्मों और व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर की गई, जिनमें आर ए कॉरपोरेशन, स्टार ट्रेडर्स, महावीर इंटरप्राइजेज, सृष्टि मिनरल्स, मार्श इंटरप्राइजेज, सोमवती सेल्स और आर्य इंटरप्राइजेज शामिल हैं।
जांच एजेंसियों की नजर में पूरा नेटवर्क
अधिकारियों के मुताबिक इन कंपनियों के खातों में धनराशि स्थानांतरित करने के बाद उसे चरणबद्ध तरीके से निकाला जाता था और अवैध नेटवर्क के जरिए कथित रूप से सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी व्यवस्था को मनी लॉन्ड्रिंग के जटिल नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। EOW-ACB का कहना है कि पूरक चालान में कई वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों को शामिल किया गया है, जो जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया
जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी भी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी पूरक चालान पेश किए जा सकते हैं। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आगामी सुनवाई में आरोपियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी। इस बहुचर्चित घोटाले में सामने आए तथ्यों ने राज्य की प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।
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