ओड़िसा /भारत
हाइलाइट्स:
- 16 मार्च को ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव
- 2 अप्रैल को चार मौजूदा सांसद होंगे सेवानिवृत्त
- BJP के 79 विधायक, दो सीटों पर जीत लगभग तय
- चौथी सीट को लेकर BJP-BJD में संभावित रणनीतिक समझौते की चर्चा
नई दिल्ली में अहम बैठक, संगठन और चुनावी रणनीति पर चर्चा
मोहन चरण माझी ने नई दिल्ली में नितिन नवीन से मुलाकात कर ओडिशा की राजनीतिक सरगर्मियों को नई दिशा दे दी है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब 16 मार्च को ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि बैठक में संगठनात्मक तालमेल मजबूत करने, सुशासन और राज्य के विकास को गति देने पर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र मिलकर ओडिशा के लोगों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात आगामी राज्यसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सेवानिवृत्त हो रहे सांसद और विधानसभा का गणित
2 अप्रैल को जिन चार सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें निरंजन बिशी और मुन्ना खान (BJD) तथा सुजीत कुमार और ममता मोहंता (BJP) शामिल हैं। 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में BJP के 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। इस गणित के आधार पर सत्ताधारी दल की दो सीटों पर जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) के पास 50 विधायक हैं और उसे एक सीट मिलने की उम्मीद है।
चौथी सीट पर सस्पेंस, संभावित गठजोड़ की अटकलें
चौथी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बरकरार है क्योंकि न तो BJP और न ही BJD के पास अपने दम पर आवश्यक संख्या है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों दल रणनीतिक समझौता कर एक साझा उम्मीदवार उतार सकते हैं। उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहले BJD से संपर्क कर चौथी सीट के लिए साझा उम्मीदवार पर विचार का प्रस्ताव दिया था। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जिससे सियासी समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
राजनीतिक संदेश और आगे की राह
विशेषज्ञ मानते हैं कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व की बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें राज्यसभा चुनाव के व्यापक राजनीतिक निहितार्थों पर भी चर्चा हुई होगी। ओडिशा की राजनीति में बदलते समीकरण यह संकेत दे रहे हैं कि आगामी चुनाव केवल सीटों की गणित नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक साझेदारियों की दिशा भी तय कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें उम्मीदवारों की घोषणा और संभावित गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि पर टिकी हैं।
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