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Wednesday, February 25, 2026

करुणा पर सवाल: रायपुर में पालतू कुत्तों पर कथित अत्याचार, BNS 2023 के तहत मामला दर्ज…

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रायपुर / छत्तीसगढ़

हाइलाइट्स
  • पड़ोसी के वीडियो से कथित क्रूरता का मामला उजागर
  • People for the Ethical Treatment of Animals (PETA इंडिया) की शिकायत पर कार्रवाई
  • खमरडीह पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत संज्ञेय अपराध
  • पीड़ित पशुओं की सुरक्षित जब्ती और चिकित्सकीय उपचार की मांग

घटना का खुलासा: वीडियो ने खोली बर्बरता की परत

राजधानी रायपुर में दो पालतू कुत्तों के साथ कथित मारपीट और उनमें से एक को उबलते पानी से झुलसाने की घटना ने शहर को झकझोर दिया है। मामला तब सामने आया जब एक चिंतित पड़ोसी ने कथित अत्याचार का वीडियो साझा किया। फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्य अत्यंत विचलित करने वाले बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्वयंसेवकों वंचना लाबन, दीपेश मौर्य और उर्जा शृंगारपुरे ने मौके पर पहुंचकर पशुओं की स्थिति का आकलन किया और गंभीर चोटों की पुष्टि की। आरोप है कि एक कुत्ते को उबलते पानी से झुलसाया गया, जबकि दोनों के साथ शारीरिक मारपीट की गई।

कानूनी कार्रवाई: BNS की धारा 325 के तहत FIR

मामले की सूचना मिलते ही People for the Ethical Treatment of Animals (PETA इंडिया) ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया। स्वयंसेवकों के सहयोग से खमरडीह पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। यह प्रावधान किसी पशु को अपंग करने या उसकी मृत्यु कारित करने को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखता है, जिसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है और संबंधित पक्षों से पूछताछ जारी है।

मानवीय दृष्टि और सामाजिक जिम्मेदारी

PETA इंडिया ने पुलिस से अनुरोध किया है कि पीड़ित कुत्तों को तत्काल सुरक्षित जब्ती में लेकर समुचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि आगे किसी संभावित क्षति को रोका जा सके। यह भी स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति की दोषसिद्धि न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी और जांच प्रक्रिया अपने निष्कर्ष तक पहुँचेगी। किंतु यह घटना समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। पालतू पशु संपत्ति नहीं, संवेदनशील जीव हैं; उनकी कराह भले शब्दों में न ढले, पर पीड़ा वास्तविक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पशु-क्रूरता को सामाजिक हिंसा के व्यापक पैटर्न के संकेत के रूप में भी देखा जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता दोनों आवश्यक हैं।

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