बिलासपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष समेत 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी मैदान में हैं और अधिवक्ताओं के बीच चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है।
चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने चुनाव पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि चुनावी प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी हो गई है, इसलिए अब इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद 12 फरवरी को प्रस्तावित मतदान का रास्ता साफ हो गया है।
प्रशासक समिति की अधिसूचना को दी गई थी चुनौती
एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासक समिति द्वारा जारी चुनावी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका में तर्क दिया गया कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी को 15 सदस्यों से बढ़ाकर महिला आरक्षण लागू किया गया, जबकि प्रशासक को पदों की संख्या बढ़ाने का अधिकार नहीं है। उनका कहना था कि यह अधिकार केवल सामान्य सभा को है। हालांकि, सुनवाई के दौरान बताया गया कि बार एसोसिएशन का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हाईकोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद के मार्गदर्शन में प्रशासक ने चुनावी प्रक्रिया शुरू की।
अध्यक्ष समेत 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी मैदान में
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी सूचना के अनुसार वर्ष 2026–2028 के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष पद पर सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव, अरविंद सिन्हा, दिनेश कुमार तिवारी, अब्दुल वहाब खान, शैलेन्द्र कुमार बाजपेयी, हनुमान प्रसाद अग्रवाल और रजनीश सिंह बघेल चुनाव लड़ रहे हैं। उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, ग्रंथालय सचिव और कार्यकारिणी सदस्य समेत विभिन्न पदों पर कुल 61 प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। अधिवक्ताओं के बीच इस चुनाव को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और सभी की निगाहें अब 12 फरवरी के मतदान पर टिकी हैं।


