रायपुर /छत्तीसगढ़
आज के समय में जब आधुनिक जीवनशैली के दबाव में पारंपरिक पर्व और सामूहिक सांस्कृतिक आयोजन सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे में मकर संक्रांति जैसे उत्सव समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। यह पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं देता, बल्कि सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश भी देता है। रायपुर में आयोजित आंध्रा एसोसिएशन का मकर संक्रांति समारोह इसी भावना का सशक्त और प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।

समारोह का आयोजन और शुभारंभ:
श्री बालाजी विद्या मंदिर, सेक्टर-2, देवेंद्र नगर, रायपुर में आंध्रा एसोसिएशन, रायपुर द्वारा भव्य मकर संक्रांति समारोह अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल श्री रामेन डेका (छत्तीसगढ़) के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। समारोह में श्रीमती संध्या राज ने मकर संक्रांति के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व बताया, जो नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और छात्र सहभागिता:
कार्यक्रम की सांस्कृतिक श्रृंखला का शुभारंभ गणेश स्तुति नृत्य से हुआ, जिसे कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा कु. टी. हासिनी ने अत्यंत भावपूर्ण और शास्त्रीय शैली में प्रस्तुत किया। इसके पश्चात श्री वेतुरी नागेश एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत संक्रांति गीतों ने पूरे परिसर को लोक-संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। स्वागत नृत्य में कक्षा दूसरी एवं छठवीं के छात्र-छात्राओं की सहभागिता ने दर्शकों का मन जीत लिया और यह स्पष्ट किया कि विद्यालय में सांस्कृतिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है।

मुख्य आकर्षण: सुरों की अविस्मरणीय संध्या:
समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण इंडियन आइडल से चर्चित कलाकार तथा इसी विद्यालय की पूर्व छात्राएँ बी. शिरीषा और बी. सौजन्या की सुरमयी प्रस्तुति रही। दोनों कलाकारों ने हिन्दी और तेलुगु गीतों की मनोहारी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। शिरीषा द्वारा गाए गए लोकप्रिय हिन्दी गीत पर कक्षा नवमीं एवं ग्यारहवीं की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत आकर्षक नृत्य ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। दर्शक दीर्घा में बैठे लोग तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए।

समाज की भूमिका और समापन:
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष श्री जी. स्वामी ने आंध्रा समाज द्वारा किए गए शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने समाज की एकता और सक्रिय सहभागिता को इसकी सबसे बड़ी शक्ति बताया। समारोह में समाज के बड़ी संख्या में लोग, विद्यालय की प्राचार्या, उपप्राचार्या, शिक्षकगण, छात्रवृंद एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अभ्यागतों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। मनमोहक आतिशबाजी और रात्रि भोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन न केवल मकर संक्रांति का उत्सव था, बल्कि सांस्कृतिक एकता, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
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