भिलाई/ छत्तीसगढ़
भिलाई नगर निगम क्षेत्र में उद्योगों पर लगाए गए निर्यात टैक्स को लेकर विवाद तेज हो गया है। उद्योगपतियों ने इस टैक्स को पूरी तरह नियम विरुद्ध बताते हुए नगर निगम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूरे प्रदेश में कहीं भी निर्यात टैक्स लागू नहीं है, लेकिन केवल भिलाई नगर निगम ही इस नियम के तहत टैक्स वसूल रहा है। आपत्ति के बावजूद निगम की ओर से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं और अब टैक्स नहीं जमा करने वाले उद्योगों पर कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उद्योगपति अरविंदर सिंह खुराना ने बताया कि निगम पिछले 5–6 महीनों से निर्यात टैक्स जमा करने का दबाव बना रहा है, जबकि इसके लिए कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान मौजूद नहीं है। उद्योगपतियों का कहना है कि वर्ष 2017 से अब तक का टैक्स वसूला जा रहा है, जो उनके लिए आर्थिक व मानसिक दबाव का कारण बन गया है। इस मामले को लेकर उद्योगपतियों ने सांसद और विधायकों से भी मुलाकात की, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और स्टील चैंबर ने भी निगम के इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब जीएसटी लागू हो चुका है और देश में “वन नेशन वन टैक्स” की नीति लागू है, तो फिर निर्यात टैक्स की अलग से वसूली कैसे की जा सकती है। वहीं, नगर निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने कहा कि निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर है और कर्मचारियों के वेतन के लिए राजस्व की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 2017 से लागू इस टैक्स से करीब 50 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। निगम आयुक्त ने यह भी कहा कि यदि उद्योगपतियों को आपत्ति है तो वे राज्य सरकार से संपर्क करें।
उद्योगपतियों और निगम के बीच बढ़ते इस टकराव के कारण हालात और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। यदि जल्द ही इस मुद्दे का समाधान नहीं निकला, तो उद्योग संगठनों द्वारा आंदोलन तेज किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
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