नई दिल्ली/भारत
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी नागरिक को कानूनी आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है या जांच एजेंसियों की ओर से देर रात गिरफ्तारी का खतरा होता है, तो वह आधी रात में भी संवैधानिक अदालतों से तत्काल सुनवाई की मांग कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर की हाई कोर्ट वास्तव में जनता की अदालतें बनें, जहां कार्य समय के बाद भी न्याय के दरवाजे खुले रहें।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में लंबित संवैधानिक याचिकाओं के निस्तारण के लिए अधिक से अधिक संविधान पीठों का गठन शामिल है। इन याचिकाओं में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता से जुड़ी याचिकाएं भी हैं, जिनकी शुरुआत बिहार से हुई थी और अब यह प्रक्रिया करीब एक दर्जन राज्यों में चल रही है।
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि वे महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन से संबंधित लंबित मामलों पर सुनवाई के लिए नौ न्यायाधीशों की पीठ गठित करने की व्यवहार्यता पर विचार कर रहे हैं। साथ ही अब महत्वपूर्ण मामलों में वकीलों को अनावश्यक रूप से कई दिनों तक बहस करने की छूट नहीं होगी, क्योंकि चीफ जस्टिस ने समयबद्ध सुनवाई की सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
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