रायपुर /छत्तीसगढ़ / मनोरंजन
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आज 24 दिसंबर को मायाराम सुरजन हाल में हिंदी सिनेमा के अमर स्वर मोहम्मद रफ़ी साहब के जन्मोत्सव पर एक भव्य संगीत का आयोजन संपन्न हुआ। “सौ बार जनम लेंगे” की पंक्तियों से प्रेरित कार्यक्रम की थीम “सौ बार जनम लेंगे” रखी गई, जबकि संध्या का मूल भाव “सौ बार जनम लेंगे” की भावना से जुड़ते हुए “सौ बार जनम लेंगे” की गहन संगीतमय श्रद्धांजलि को समर्पित रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना गीत से हुई, जिसने वातावरण में पवित्रता और भावनात्मक जुड़ाव का रंग घोल दिया। आयोजन के संस्थापक एवं निर्देशक हेमंत कुमार, मंच संचालक सादिक खान एवं लक्ष्य टारगेट , संरक्षक व मुख्य सलाहकार मनोहर ठाकुर और कार्यक्रम संयोजक इकबाल भाई की देखरेख में यह आयोजन रूपांतरित होकर रफ़ी साहब के सुरों का जीवंत स्मारक बन गया। लक्ष्य टारगेट की संकल्पना के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा में चुनिंदा और लोकप्रिय गीतों को प्राथमिकता दी गई, जिससे हर प्रस्तुति में कला और भावनात्मक गहराई का संगम दिखाई दिया।
गायकों की प्रस्तुतियां – आवाज़ों में रफ़ी की रूह का एहसास
संगीतमयी संध्या में स्थानीय और प्रतिष्ठित कलाकारों ने रफ़ी साहब के सदाबहार गीतों को अपने स्वर से नई ऊर्जा और आत्मीयता प्रदान की। गायक कलाकारों में हेमंत कुमार, मनोहर ठाकुर, सत्यम, पवन मंडावी, प्रदीप साहू, जैनुल हक़, ज़ीशान खान, प्रशांत नाग, एन.के. चक्रवर्ती, मोहिनी मल्लेवार, अपूर्वा ठाकुर, ज्योती पाटिल, रूपा मंडावी, नफीसी अली, आयशा खान सहित प्रतिभाशाली कलाकार शामिल रहे। कलाकारों ने “छू लेने दो नाज़ुक होठों को”, “इक न इक दिन ये कहानी बनेगी”, “इतना तो याद है मुझे”, “तुमने किसी की जान को”, “इशारों इशारों में”, “जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम”, “अभी न जाओ छोड़कर” और “तुम्हारी नज़र क्यों खफा हो गई” जैसे गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर गीत में सुरों की शालीनता, भावों की नजाकत और गायकी की संवेदनशीलता रफ़ी साहब की आत्मा का प्रतिबिंब बनकर उभरी। पूरा हाल संगीत प्रेमियों से खचाखच भरा रहा और हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज यह साबित करती रही कि रफ़ी साहब आज भी हर दिल में जीवित हैं।

कार्यक्रम की समाप्ति – मिठास, यादें और संगीत का अनमोल उपहार
कार्यक्रम का समापन रफ़ी साहब के जन्मदिन के सम्मान में केक काटकर किया गया, जो आयोजन की आत्मीयता और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बना। आयोजन मोहम्मद रफ़ी साहब की स्मृति और उनके सांगीतिक योगदान के प्रति समर्पण की एक अनुकरणीय मिसाल बनकर सामने आया। संरक्षक मनोहर ठाकुर ने कार्यक्रम के दौरान कहा, “रफ़ी साहब सिर्फ़ एक आवाज़ नहीं, बल्कि संगीत की पूरी विरासत हैं, जिन्हें हर पीढ़ी को संजोना चाहिए।” वहीं संस्थापक हेमंत कुमार ने कहा, “यह आयोजन हर साल हमें रफ़ी साहब के करीब ले आता है और उनके सुरों को जीवंत बनाए रखता है।” संगीत प्रेमियों के लिए यह संध्या यादों, सुरों और भावनाओं का ऐसा गुलदस्ता बन गई, जिसकी खुशबू देर रात तक रायपुर के संगीत-प्रेमी मन में बसी रही। कार्यक्रम सफल रहा |
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