31.1 C
Raipur
Sunday, March 22, 2026

नई गाइडलाइन दरों से मिली असली राहत; इंक्रीमेंटल सिस्टम खत्म, मूल्यांकन हुआ और सरल…

HomeChhattisgarhनई गाइडलाइन दरों से मिली असली राहत; इंक्रीमेंटल सिस्टम खत्म, मूल्यांकन हुआ...

Date:

हाइलाइट बॉक्स:
राज्य सरकार ने जमीन और संपत्तियों के मूल्यांकन से जुड़े कई बड़े सुधार लागू किए हैं। इंक्रीमेंटल सिस्टम समाप्त, स्लैब आधारित व्यवस्था वापस, बिल्ट-अप एरिया पर मूल्यांकन, व्यावसायिक संपत्तियों पर छूट, ग्रामीण क्षेत्रों में भारी कमी—इन बदलावों से आम नागरिकों, खरीदारों और डेवलपर्स को प्रत्यक्ष राहत मिलने लगी है।

नई गाइडलाइन दरें: पारदर्शिता और सरलता की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की 7 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में राज्य सरकार ने पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कई अहम फैसले लिए। सबसे बड़ा निर्णय शहरों में लागू ‘इंक्रीमेंटल सिस्टम’ को समाप्त कर पूर्व की स्लैब आधारित प्रणाली को फिर से लागू करने का रहा। अब नगर निगम क्षेत्रों में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन होगा। अधिकारियों के मुताबिक, इससे प्रक्रिया की जटिलता कम होगी और नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में कहा, “नई व्यवस्था से मूल्यांकन न केवल सरल हुआ है, बल्कि बाजार स्थिति के अधिक अनुरूप भी हो गया है।”

बहुमंजिला इमारतों के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव

फ्लैट, दुकान और कार्यालय के ट्रांसफर में अब सुपर बिल्ट-अप नहीं, बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर मूल्यांकन होगा, जो लंबे समय से उठ रही मांग थी। इसके साथ ही बहुमंजिला इमारतों में बेसमेंट और प्रथम तल पर 10% तथा दूसरे तल से ऊपर 20% की छूट देने का निर्णय लिया गया है। वहीं, मुख्य मार्ग से 20 मीटर भीतर स्थित कमर्शियल संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में 25% कमी की गई है। इन सुधारों से मध्यम वर्ग के लिए आवासीय इकाइयाँ अधिक किफायती होंगी और रियल एस्टेट सेक्टर में तेज़ी आने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप यह संशोधन निवेश और खरीद-फरोख्त को प्रोत्साहित करेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में भारी राहत: पेड़ों का मूल्यांकन भी हटाया गया

ग्रामीण इलाके भी इस सुधार से अछूते नहीं रहे। परिवर्तित भूमि पर सिंचित भूमि के ढाई गुना मूल्य जोड़ने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। इतना ही नहीं, दो फसली भूमि का अतिरिक्त 25% मूल्य, ट्यूबवेल-कुएं तथा वृक्षों के मूल्य को भी अब भूमि मूल्य में नहीं जोड़ा जाएगा। कांकेर में एक मामले में 600 वृक्षों के 78 लाख रुपये मूल्य को रजिस्ट्री में शामिल न करने से खरीदार को सीधे 8.58 लाख रुपये की राहत मिली। इसी तरह रायपुर के वार्ड 28 में जहां पहले एक एकड़ भूमि का मूल्य 78 करोड़ रुपये आंका जाता था, वही अब केवल 2.4 करोड़ रह गया है। नजूल, आबादी एवं परिवर्तित भूमि के लिए वर्गमीटर की जगह हेक्टेयर दर लागू होने से मूल्यांकन अब कहीं अधिक यथार्थपरक हो गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पंजीयन प्रक्रिया आम लोगों के लिए सुलभ, किफायती और पारदर्शी बने तथा अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हो।

ख़बरें और भी…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related