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Tuesday, March 31, 2026

क्या पंजाब की पहचान पर ‘संवैधानिक चोट’ केजरीवाल का केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप…

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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार का संविधान संशोधन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं , बल्कि पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और उसकी ऐतिहासिक पहचान पर सीधा हमला है । उन्होंने आरोप लगाया कि फेडरल स्ट्रक्चर को कमजोर कर पंजाबियों के हक़ छीने जा रहे हैं—यह देश की एकता के लिए खतरनाक संकेत है ।

रायपुर/नई दिल्ली आम आदमी पार्टी AAP के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है । उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा चंडीगढ़ को लेकर प्रस्तावित संविधान संशोधन न सिर्फ प्रशासनिक हस्तक्षेप है , बल्कि पंजाब की ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है । उनके अनुसार यह कदम संघीय ढांचे के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है और लोकतांत्रिक परंपराओं को झटका देता है ।

केजरीवाल ने कहा कि ‘‘BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं , बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है ।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह मानसिकता भारतीय संघवाद की आत्मा को चोट पहुंचाती है ।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब ने हमेशा देश की सुरक्षा , अनाज , पानी और इंसानियत के लिए बलिदान दिया है , लेकिन आज उसी पंजाब को उसके असली हिस्से से दूर किया जा रहा है । उनके मुताबिक , चंडीगढ़ सिर्फ एक प्रशासनिक राजधानी नहीं , बल्कि पंजाब की ऐतिहासिक और भावनात्मक धरोहर भी है । ‘‘पंजाबियों के हक़ छीनकर फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं , और यह बेहद खतरनाक मानसिकता है , ’’ उन्होंने कहा ।

AAP नेताओं का कहना है कि यदि राज्यों के अधिकार लगातार केंद्र के हाथों में समेटे जाते रहे , तो भविष्य में देश का संघीय संतुलन बिगड़ सकता है । पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि लोगों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराज़गी है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्र सरकार इस तरह के संवेदनशील विषयों पर राज्यों की भावनाओं का सम्मान करेगी ।

पंजाब के कई सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को सीमित करना ऐतिहासिक तथ्यों और संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत है । एक नागरिक समूह के सदस्य ने बताया कि “लोगों में बेचैनी है , क्योंकि चंडीगढ़ पंजाब की पहचान का अहम हिस्सा रहा है । फैसले जल्दबाज़ी में नहीं होने चाहिए ।”

उधर , राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंडीगढ़ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी तरह का संशोधन बिना व्यापक विमर्श के किया जाना राज्यों और केंद्र के बीच अविश्वास को बढ़ा सकता है । विशेषज्ञों ने कहा कि देश के फेडरल ढांचे को मजबूत रखना ही राष्ट्रीय एकता का आधार है ।

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