हाइलाइट :
- 4 सूत्रीय मांगों को लेकर समिति कर्मचारियों का प्रदर्शन
- 67 समितियों के 400 कर्मचारी धरने पर बैठे
- आउटसोर्सिंग और वेतन कटौती का किया विरोध
- मांगे नहीं मानी गईं तो धान खरीदी ठप करने की चेतावनी
गरियाबंद। जिले में धान खरीदी की तैयारियों के बीच शुक्रवार को सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। जिले की 67 समितियों के लगभग 400 कर्मचारियों ने काम बंद कर गांधी मैदान से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए खरीदी प्रक्रिया में देरी का ठीकरा उन पर फोड़े जाने का विरोध किया और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती पर आपत्ति जताई।

प्रदर्शन के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। संघ के प्रतिनिधि मंडल ने एसडीएम हितेश्वरी वाघे को ज्ञापन सौंपा। बताया गया कि राज्य में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है, ऐसे में कर्मचारियों ने खरीदी व्यवस्था को लेकर कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य मांगें और मुद्दे
संघ ने सुखत की भरपाई, धान उठाव में देरी पर जवाबदारी तय करने, आउटसोर्सिंग भर्ती पर रोक लगाने, वेतन कटौती खत्म करने और सेवा नियमों में संशोधन की मांग की है। साथ ही मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर 3 लाख रुपये का प्रबंधकीय अनुदान देने की भी मांग रखी गई है। संघ के पदाधिकारियों ऋषिकांत मोहरे और दिनेश चंद्राकर ने कहा कि उठाव में देरी से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है और कई बार कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है।
सरकार को चेतावनी – आंदोलन रहेगा जारी
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी धान खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत 12 नवंबर को जिला और संभाग स्तर पर रैली निकालकर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती।
ख़बरें और भी…


