रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार नारायणपुर जिले की तीन युवतियों ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवतियों ने राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किए जाने के दौरान जीआरपी थाने में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और दुष्कर्म की धमकी दी।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बताया कि युवतियों की शिकायत पर 20 अगस्त को सुनवाई की गई थी। तीनों पीड़िताएं सुनवाई में मौजूद रहीं, लेकिन प्रतिवादी पक्ष अनुपस्थित था। आयोग ने दुर्ग पुलिस अधीक्षक और जीआरपी पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ
25 जुलाई को बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत पर जीआरपी ने केरल की नन प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और नारायणपुर निवासी सुकमन मंडावी को दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। आरोप था कि ये लोग नारायणपुर की तीन युवतियों को जबरन धर्मांतरण कराकर उनकी तस्करी कर रहे थे। बाद में विशेष अदालत से जमानत मिलने पर तीनों आरोपियों को 2 अगस्त को दुर्ग जेल से रिहा कर दिया गया था।
युवतियों का आरोप
पीड़ित युवतियां – सुखमती मंडावी, ललिता उसेंडी और कमलेश्वरी प्रधान (आयु 19 से 21 वर्ष) – ने बताया कि वे अपनी मर्जी और परिवार की सहमति से काम करने के लिए आगरा जा रही थीं। लेकिन रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उन्हें पकड़ लिया, गाली-गलौज की और थाने में ले जाकर उनसे बदसलूकी की। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस दौरान उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं और दुष्कर्म की धमकी भी दी गई।
पुलिस और आयोग की कार्रवाई
युवतियों ने पहले नारायणपुर पुलिस और एससी-एसटी थाने में शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर वे राज्य महिला आयोग पहुँचीं। आयोग ने जीआरपी थाना प्रभारी समेत दो अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और 25 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा है।
बजरंग दल का पक्ष
बजरंग दल की कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई को वह अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जीआरपी थाने में मौजूद थीं, लेकिन किसी ने भी युवतियों के साथ बदसलूकी नहीं की। शर्मा ने कहा कि यदि महिला आयोग से उन्हें नोटिस मिलेगा तो वे अवश्य उपस्थित होंगी।
यह वही मामला है, जिसमें ननों और सुकमन मंडावी को गिरफ्तार किया गया था और बाद में एनआईए कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। अब युवतियों के आरोपों के बाद यह मामला नए विवाद का रूप ले चुका है।
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