बिलासपुर : 18 जुलाई 2025
बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड में महतारी वंदन योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जांच में सामने आया है कि विकासखंड के 26 शिक्षकों ने शासन की नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाई और अपनी पत्नियों के नाम से योजना का लाभ दिलवाया। इन पत्नियों के खातों में बीते 11 महीनों से हर माह ₹1000 की राशि भेजी जा रही थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग, कोटा की परियोजना अधिकारी सुरुचि श्याम ने बताया कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, संबंधित शिक्षकों की सूची विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई और तुरंत राशि वापस जमा कराने को कहा गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि कुछ शिक्षकों ने राशि लौटाना शुरू कर दिया है, लेकिन समयसीमा में भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ वेतन रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए है और स्पष्ट नियम है कि किसी भी शासकीय, अर्द्धशासकीय या संविदा कर्मचारी अथवा उनके परिवार को इसका लाभ नहीं मिल सकता। इसके बावजूद शिक्षकों द्वारा योजना का दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन की मंशा को गहरा आघात पहुंचा है।
इस मामले में जिन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, उनमें जयद्रथ खुसरो, दालसिंह, गोवर्धनसिंह पैकरा, सहोरिक जगत, नारायणदास मानिकपुरी, रुस्तम सिंह खुसरो, सुखराम गंधर्व, राममिलाप, शिवकुमार जगत, सत्यनारायण मरावी, रमेश साहू, नारायण खांडे, चंदन सिंह धुर्वे, गौतम कुमार कुर्रे, विजय सतनामी, कमल सिंह, बनवारी लाल, श्यामलाल, राजकुमार पाव, कार्तिक यादव, सुनील कुमार, पवन सिंह, शंकरलाल सूर्यवंशी, प्रमोद कुमार साहू, हेमपाल पैकरा और बसंत कुमार शामिल हैं।
जनता और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल राशि वसूली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षक जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों द्वारा की गई इस प्रकार की अनियमितता गंभीर मामला है, इसलिए दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का दुस्साहस न कर सके।
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