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झूठे आरोपों की साजिश या सिस्टम की चाल? मधु तिवारी के समर्थन में उठने लगे सवाल, हाईकोर्ट का रुख करेंगी पीड़िता…

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धमतरी : 14 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक महिला कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर कैसे पूरे सिस्टम को बचाया जा रहा है, इसे भी उजागर किया है। मधु तिवारी नाम की महिला कर्मचारी को भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है — वो भी बिना स्वतंत्र जांच और सुनवाई के। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यह कार्रवाई रविवार जैसे अवकाश के दिन की गई, जब राज्य स्वास्थ्य मिशन का कार्यालय सामान्यतः बंद रहता है। इससे आदेश की वैधता और मंशा दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

1. चयन समिति बनी जांचकर्ता, न्याय की खुली हत्या?

जिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, उसे अंजाम देने वाली चयन समिति को ही जांच की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। डॉ. विजय फुलमाली, डॉ. टीआर ध्रुव और डीपीएम डॉ. प्रिया कंवर को जांच अधिकारी बनाया गया — जबकि वे सभी खुद चयन प्रक्रिया का हिस्सा थे। यह स्पष्ट रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है कि एक व्यक्ति अपने ही निर्णय की जांच करे। प्रिया कंवर ने जांच से खुद को अलग किया, लेकिन बाकी अफसरों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई कर दी गई। सवाल है – क्या यह निष्पक्ष जांच थी?

2. बर्खास्त टोमन कौशिक की वापसी और झूठे आरोपों की शुरुआत

इस मामले में आरोप लगाने वाला व्यक्ति टोमन कौशिक खुद पूर्व में आपराधिक मामले में जेल जा चुका है और विभाग से बर्खास्त किया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि बाद में उसे विभाग में दोबारा बहाल कर लिया गया, और वह लगातार आरटीआई डालकर मधु तिवारी के खिलाफ झूठे आरोप लगाने लगा। सूत्र बताते हैं कि सीएमएचओ डॉ. यू.एल. कौशिक और डीपीएम डॉ. प्रिया कंवर की मिलीभगत से टोमन को वापस नौकरी मिली, और उसकी नियुक्ति में कई प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।

3. एकतरफा कार्रवाई, वरिष्ठ अफसर क्यों निर्दोष?

अगर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, तो क्या एकमात्र मधु तिवारी दोषी हो सकती हैं? चयन समिति में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे, डीपीएम राजीव बघेल समेत कई अधिकारी थे, लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्या यह उच्च पदस्थ अधिकारियों को बचाने की सोची-समझी योजना है?

4. रविवार को आदेश, विधानसभा प्रश्न से एक दिन पहले कार्रवाई:

मधु तिवारी की सेवा समाप्ति का आदेश रविवार को जारी हुआ — वह भी तब, जब कार्यालय अवकाश में बंद रहता है। इससे संदेह होता है कि आदेश को बैकडेट किया गया।

गौरतलब है कि धमतरी विधायक ओंकार साहू ने विधानसभा में भर्ती घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं पर तारांकित प्रश्न लगाया था। उसी से ठीक एक दिन पहले मधु तिवारी पर कार्रवाई कर दी गई। क्या यह कदम राजनीतिक जवाबदेही से बचने के लिए उठाया गया?

5. बिना सुनवाई, बिना स्वतंत्र जांच – सीधे दंड!

मधु तिवारी पर बिना किसी स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट के सीधे कार्रवाई कर दी गई। उन्हें अपनी बात कहने का मौका भी नहीं मिला। प्राकृतिक न्याय की बुनियादी मांग है कि — “जिस पर आरोप हो, उसे सुनने का अवसर मिलना चाहिए।” लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।

6. हाईकोर्ट जाएंगी मधु तिवारी – न्याय के लिए जंग शुरू

अपने आत्मसम्मान, करियर और सच्चाई के लिए लड़ रहीं मधु तिवारी अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शरण में जा रही हैं। उनका कहना है “अगर दोष मेरा है, तो क्या चयन समिति, सीएमएचओ और डीपीएम पूरी तरह निर्दोष हैं?” उनकी यह जंग सिर्फ एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए है जो सिस्टम की सांठगांठ का शिकार होते हैं।

7. अफसर चुप, सवाल कायम – क्या सिस्टम दोषियों को बचा रहा है?

  • अगर टोमन कौशिक पहले बर्खास्त हो चुका था, तो उसकी शिकायत को वैध कैसे माना गया?
  • चयन करने वाले अफसरों को जांच से क्यों नहीं हटाया गया?
  • बिना विभागीय अपील या सेवा न्यायाधिकरण की प्रक्रिया के, सीधी बर्खास्तगी क्यों?
  • क्या मधु तिवारी को ही बलि का बकरा बना दिया गया?

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