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अमृत महोत्सव के जश्न में बसुध विभाग,ग्राम वासी आवास,पेयजल को तरस रहे …….

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सारंगढ़ : 17 मार्च 2023 ( मिलाप बरेंठ )

एक तरफ देशभर में आजादी के 75वे वर्षगांठ के उपलक्ष्य मे अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं आज भी जिले के कई गांव ऐसे है, जहां लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सड़क,बिजली,पानी और आवास योजना की सुविधा आज तक नहीं पहुंच सकी है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपेक्षा का खामियाजा भोगने को विवश हैं। ऐसे ही ग्राम पंचायत मल्दा (ब) का आश्रित गांव देवसर है , जो गोमार्डा अभ्यारण के बीच बसे इस गांव के लोग विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है।जिला मुख्यालय से तकरीबन 15 किमी दूर ग्राम पंचायत मल्दा (ब) के आश्रित गांव देवसर के लोग वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहें है। सात यादव परिवार के तीस चालीस की जनसंख्या वाला गांव देवसर पेयजल,आवास योजना, तेंदूपत्ता संग्रहण आदि जैसे सरकारी योजनाओं की लाभ एवम सुविधाओं से वंचित है। गांववालों को मताधिकार तो मिला है लेकिन इसका लाभ चुनाव लडने वालों तक ही सीमित है।चुनाव जीतने के बाद सरपंच से लेकर विधायक सांसदो को भी इस गांव की बेहतरी के समय नही मिलता है। गोमर्डा अभ्यारण के बीच बसे होने का खामियाजा यहां के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार के कल्याणकारी योजनाओं से वंचित होने के कारण विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर ,अभाव मे जिंदगी जीने को मजबूर हैं।बरसात मे पहाड़ी नालों से बहती पानी से गुजर बसर करने वाले ग्रामिणजनों को भीषण गर्मी में निस्तारी एवम पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ता है। गांव मे एक पानी टंकी और ट्यूबवेल है जो सालों से बंद पड़ा है। नल की टोंटी से पानी की धारा गिरने की बजाय हवा निकलती है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम मे निस्तारी एवम पेयजल की सुविधा मिलती है,परंतु अक्टूबर नवम्बर लगने के साथ ही निस्तारी और पेयजल की परेशानी होने लगती है। जो आगामी बरसात तक बनी रहती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि निस्तारी और पेयजल के लिए दो किमी की दूरी तय कर पंचायत मुख्यालय तक आते हैं।जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस दिशा मे कोई प्रयास नहीं करते हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीण एवम शहरी क्षेत्र के पात्र हितग्राहियों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की मंशा इस गांव मे असफल साबित हो रहा हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक इस समुदाय के लोगो को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। पक्के मकान की सपना यहां के ग्रामीणों के लिए सपना बन कर रह गया है। ग्राम पंचायत,जनपद और जिला पंचायत तक आवास सम्बंधी समस्या से अवगत कराया गया,परंतु आज पर्यंत तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आवास दिलाने के बजाय सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों ने बताया कि यहां के निवासी खेतिहर मजदूर हैं। तेंदूपत्ता तोड़ने का कार्य करते थे,परंतु विगत कई वर्षों से वन विभाग के आदेश से बंद है। प्रोत्साहन राशि सिर्फ एकही बार मिला है लेकिन उसके बाद से अब तक नहीं मिला है। विभागीय अधिकारी भी जानकारी नहीं बताते हैं।
केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा गांव,गरीब और किसानों के हित मे अनेक लाभकारी योजनाएं संचालित किया जा रहा है,ताकि सभी पात्र हितग्राही योजनाओं से लाभान्वित होकर विकास की मुख्यधारा मे जुड़ सके। देवसर के ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से आग्रह किया है कि गांव वासियों को सरकार के सभी लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलावे।

पढने की जिद और जुनून ऐसा कि जंगल के बीच लंबी दूरी तय कर विद्यालय आते हैं बच्चे।

जिला मुख्यालय से लगभग पंद्रह किमी की दूरी पर स्थित मल्दा ब के आश्रित ग्राम देवसर के नौनिहालों की आपबीती , जिनकी पढ़ने की जिद और जूनून के साथ अदम्य साहस के आगे जंगल की पथरीली राह और दो किमी की दूरी भी कम लगती है। सारंगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मल्दा ब के आश्रित ग्राम देवसर के ये जांबाज बच्चे ,जो रोजाना जंगल की पगडंडी पर चलकर विद्यालय की दहलीज तक पठन पाठन के लिए पहुंचते है। पढ़ लिखकर अपना और गांव,समाज तथा देश का नाम रोशन करने की चाह मे ये बच्चे जंगल की राह और दो किमी लंबी दूरी को चलकर रोजाना विद्यालय पहुंचते है। जंगल के बीच बसा गांव देवसर, जहां महज सात परिवार के पैंतीस चालीस लोग निवास करते हैं। वहां के नौनिहाल सुखद और सुरक्षित भविष्य के सपनों को साकार करने शिक्षा की मंदिर तक पहुंचते है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद देवसर के ग्रामीणजन अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर कुछ बनाने की अभिलाषा मे बेहतर शिक्षा देने सरकार की सब पढ़े सब बढे की अवधारणा को साकार करने हरसंभव प्रयासरत है। विदित हो कि 1985 मे ग्राम पंचायत मल्दा के आश्रित ग्राम देवसर मे केडार के आसपास के गांव के चार पांच परिवार गोमर्डा अभ्यारण के बीच ग्राम देवसर मे आकर बस गए थे। गोमर्डा अभ्यारण के बसे यादव समुदाय मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे है। तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद इस गांव मे ज्ञान की रोशनी पहुंचने लगी है। राज यादव कक्षा चौथी,राहुल यादव कक्षा दूसरी, यश यादव कक्षा तीसरी,रवि यादव कक्षा पांचवीं,लंकेश्वरी यादव कक्षा छठवीं मे पढ़ते हैं। इन बच्चों ने समवेत स्वर मे कहा कि उन्हें पढ़ने जाना अच्छा लगता है। अभिभावकों के साथ पारी पारी अक्सर पैदल कभी साइकिल से विद्यालय की दहलीज तक पहुंचते है। ये बच्चे दस बारह तक के पहाड़ा,सामान्य गणित एवम पठन लेखन कौशल मे निपुण हैं। प्राथमिक शाला मल्दा ब के प्रधान पाठिका श्रीमती मंजू पटेल ने बताया कि इन सभी बच्चों को सरकार के सभी कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत निः शुल्क पुस्तक, गणवेश,मध्यान्ह भोजन आदि नियमित रूप से दिया जाता है। सभी बच्चे नियमित विद्यालय आते है और पढाई लिखाई मे रुचि रखते हैं। इसी प्रकार माध्यमिक शाला मल्दा ब के प्रभारी सुभाष पटेल ने बताया कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा एवम पौष्टिक भोजन के साथ साथ पुस्तक,गणवेश आदि की सुविधाएं दी जाती है। बहरहाल,बच्चों की पढ़ने की जिद और जुनून और उनके अभिभावकों की जागरूकता शिक्षा के प्रति रुझान को दर्शाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि: पानी की समस्या को लेकर विधायक द्वारा बोर खनन कराया गया था प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सूचियों में नाम ही नहीं है और इससे ज्यादा मैं नहीं बता सकता क्योंकि कुछ दिन पहले ही यहां मैं आया हूं |
केशव चौहान पंचायत सचिव मल्द ब: इस संबंध में जनपद पंचायत सीईओ एवं पंचायत इंस्पेक्टर से उनके फोन नंबरों पर संपर्क किया गया लेकिन उनका मोबाइल की घंटी बस्ती ही रही लेकिन उन लोगों द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। बीएल खरे सहायक अभियंता पीएचई विभाग सारंगढ़ गांव वालों द्वारा मुझे सूचना दिया गया है खेत में बोर है, लेकिन जल स्रोत नीचे चले जाने के कारण उसमें पाइप लगाने के लिए कर्मचारियों को बोला हूं दो-चार दिनों में बोर चालू हो जाएगा |

मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्राम पंचायत मल्दा ब के आश्रित गांव देवसर

प्रधानमंत्री आवास योजना की मोहताज हैं देवसरवासी

पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं ग्रामवासी, पीएचई विभाग को सुध लेने का समय नहीं

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