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तेज आवाज वाले डीजे पर कार्रवाई की मांग, सिख संस्था ने पुलिस से स्वतः संज्ञान लेकर कदम उठाने को कहा…

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त्योहारी आयोजनों में निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज को लेकर चिंता, नियमों के पालन और पुलिस कार्रवाई की मांग
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सिख संस्था ने तेज आवाज वाले डीजे और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा उठाया | पुलिस से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग | अदालतें भी धार्मिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जता चुकी हैं | निर्धारित समय और ध्वनि सीमा के पालन पर जोर

रायपुर। त्योहारी आयोजनों और धार्मिक जुलूसों के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लेकर विवाद फिर सामने आया है। सिख संस्था ने पुलिस से अत्यधिक तेज आवाज में बजाए जा रहे डीजे के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है। इस हेतु रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला को ज्ञापन सौंपा | संस्था का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में उत्सव की अनुमति के साथ आम नागरिकों के शांतिपूर्ण वातावरण और निर्धारित ध्वनि मानकों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण को लेकर न्यायपालिका भी हाल के दिनों में सख्त रुख दिखा रही है। बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में धार्मिक जुलूसों के दौरान तेज संगीत, डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि निर्धारित ध्वनि मानकों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सिख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा ने कहा कि अत्यधिक तेज आवाज ,संगीत और कम्पन से बुजुर्ग नागरिकों,ह्रदय रोगियों एवं नवजात शिशुओं को असुविधा होती है |

अदालत की कार्यवाही में यह भी सामने आया कि कुछ धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्र देर रात तक तेज आवाज में चलाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। न्यायालय ने अधिकारियों से ध्वनि स्तर की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर जानकारी मांगी है। अदालत का जोर इस बात पर है कि धार्मिक उत्सवों के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण से आम नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से संबंधित एक न्यायिक आदेश में भी धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियमों का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार निर्धारित अनुमति, ध्वनि सीमा और रात के समय ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। इससे स्पष्ट है कि डीजे और लाउडस्पीकर को लेकर विवाद केवल किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा व्यापक विषय है।

सिख संस्था की मांग के बाद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन तेज आवाज में बजने वाले डीजे की शिकायतों पर कितनी सक्रियता से कार्रवाई करते हैं। आयोजकों और डीजे संचालकों के लिए निर्धारित ध्वनि सीमा तथा समय संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है। वहीं प्रशासन के लिए भी यह चुनौती है कि धार्मिक आयोजनों की परंपरा और नागरिकों के शांतिपूर्ण वातावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कानून का समान रूप से पालन कराया जाए।

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