10 सूत्रीय मांगों को लेकर नया रायपुर में महानदी भवन के घेराव की तैयारी, बकाया 1,700 करोड़ रुपये के भुगतान और धान खरीदी व्यवस्था में सुधार की भी मांग |
रायपुर। प्रदेश में 16 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने के प्रस्तावित कार्यक्रम के बीच खरीदी दर बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। भारतीय किसान संघ की छत्तीसगढ़ इकाई ने धान का मूल्य वर्तमान 3,100 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 3,358 रुपये करने की मांग उठाई है। इस संबंध में संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर किसानों की मांगों पर विचार करने का आग्रह किया है। संगठन अपनी मांगों के समर्थन में 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे नया रायपुर में ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ निकालकर महानदी भवन का घेराव करेगा। इसी दिन राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी प्रस्तावित बताई गई है। ऐसे में किसानों के इस आंदोलन और उनकी मांगों पर सरकार के रुख को लेकर ध्यान केंद्रित हो गया है।
भारतीय किसान संघ का तर्क है कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में कुल 258 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है और इस बढ़ोतरी का लाभ राज्य में किसानों को मिलने वाली खरीदी दर में भी मिलना चाहिए। संघ ने वर्ष 2022-23 की धान खरीदी से संबंधित 1,700 करोड़ रुपये की कथित बकाया राशि का भुगतान करने की मांग भी की है। इसके अतिरिक्त, संगठन चाहता है कि धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित की जाए, ताकि किसानों को उपज बेचने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। बाढ़ से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को मुआवजा देने और धान खरीदी में टोकन व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
संघ की 10 सूत्रीय मांगों में अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना, निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना और गौवंदन योजना लागू करना भी शामिल है। इसके साथ ही मक्का और गेहूं की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि किसानों की आय, फसल सुरक्षा और कृषि संबंधी सुविधाओं से जुड़े इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। अब 27 अक्टूबर की रैली में किसानों की भागीदारी और सरकार की ओर से मांगों पर मिलने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। धान खरीदी का मौसम नजदीक आने के साथ ही खरीदी दर, भुगतान और व्यवस्था में सुधार से जुड़े ये मुद्दे प्रदेश की कृषि राजनीति में अहम बने हुए हैं।
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