स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वीकृत अभिन्यास में बिना संशोधन पहुंच मार्ग के इस्तेमाल और प्रकोष्ठों की संख्या में अंतर को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने लिया फैसला
हेडलाइंस:
- अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय परियोजना की विकास अनुज्ञा निरस्त
- 60 प्रकोष्ठों की अनुमति के बीच मानचित्र में 90 प्रकोष्ठ दर्शाए जाने का मामला
- पूर्व स्वीकृत अभिन्यास की भूमि को पहुंच मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने पर सवाल
- संस्था की ओर से लिपिकीय त्रुटि का दिया गया था स्पष्टीकरण
- आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों और अधिकारियों को भेजी गईं
बिलासपुर। अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय परियोजना में सामने आई दस्तावेजी विसंगतियों के मामले में नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने मेसर्स अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी है। भागीदार नमन गोयल के माध्यम से संस्था को जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किया गया है। 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा के संबंध में संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, बिलासपुर की ओर से निरस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा गया था। संस्था को अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, जिसके बाद सुनवाई एवं दस्तावेजों की जांच की गई।
पहुंच मार्ग के लिए पूर्व स्वीकृत भूमि के इस्तेमाल पर आपत्ति
जांच में सामने आई प्रमुख विसंगतियों में से एक परियोजना के पहुंच मार्ग से जुड़ी है। जांच के अनुसार जिस भूमि का इस्तेमाल पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व में स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा थी। नियमानुसार इस भूमि को नए विकास में शामिल करने से पहले पुराने स्वीकृत अभिन्यास में आवश्यक संशोधन किया जाना था। जांच समिति के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभिन्यास में संशोधन किए बिना भूमि का नए विकास के लिए इस्तेमाल किया जाना विकास अनुज्ञा की शर्तों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय था।
60 की अनुमति, मानचित्र में 90 प्रकोष्ठों का अंतर
मामले में दूसरी प्रमुख विसंगति भवन में प्रस्तावित प्रकोष्ठों की संख्या को लेकर सामने आई। विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉक, प्रत्येक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के आधार पर कुल 60 प्रकोष्ठ प्रस्तावित किए गए थे। दूसरी ओर, स्वीकृत भवन मानचित्र के कुछ हिस्सों में छह तल दर्शाए गए थे। इस गणना के आधार पर प्रकोष्ठों की संख्या 90 तक पहुंचती है। जांच समिति ने इस अंतर को महज सामान्य दस्तावेजी अंतर के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसका प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए निर्धारित प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ने की बात सामने आई।
लिपिकीय त्रुटि का स्पष्टीकरण नहीं माना संतोषजनक
अनंत रियल्टी की ओर से जांच के दौरान प्रकोष्ठों की संख्या से जुड़ी विसंगति को सलाहकार की ओर से हुई लिपिकीय क्रमांकन त्रुटि बताया गया। हालांकि, जांच समिति ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया। समिति के अनुसार स्वीकृति से पहले संबंधित अभिन्यास पर आवेदक के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में दस्तावेजों में दर्ज विवरण की जिम्मेदारी संस्था से पूरी तरह अलग नहीं की जा सकती। इसी आधार पर संचालनालय ने संस्था के जवाब को असंतोषजनक माना और विकास अनुज्ञा की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर उसे निरस्त करने का निर्णय लिया।
अन्य पहलुओं पर भी उठे सवाल
जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार परियोजना से संबंधित वास्तुकार की वैधता, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग से जुड़े दायित्वों के शपथ-पत्र तथा पहुंच मार्ग की चौड़ाई, पार्किंग और खुले स्थान जैसे विषयों पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, उपलब्ध तीन पृष्ठ के अंतिम निरस्तीकरण आदेश में इन सभी बिंदुओं को स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए इन पहलुओं को निरस्तीकरण आदेश के मुख्य आधार के बजाय जांच से जुड़े अतिरिक्त सवालों के रूप में देखा जाना चाहिए।
संबंधित विभागों को भेजी गई आदेश की प्रतियां
विकास अनुज्ञा निरस्त किए जाने के आदेश की प्रतियां आवास एवं पर्यावरण विभाग, बिलासपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश और उप पंजीयक सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं। कार्रवाई के बाद अब परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।



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