रायपुर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच तेज कर दी है। विशेष अदालत ने उन्हें 31 जुलाई तक ED की रिमांड पर भेज दिया है। एजेंसी अब कथित अवैध लेनदेन, संपत्तियों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
हेड लाइन्स
CGPSC भर्ती घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई
पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी 31 जुलाई तक रिमांड पर
मनी लॉन्ड्रिंग और कथित सिंडिकेट की जांच हुई तेज
भर्ती घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की होगी पड़ताल
अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी
रायपुर, छत्तीसगढ़: बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच को नया मोड़ देते हुए पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया। ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए रिमांड की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश ने 31 जुलाई तक रिमांड मंजूर कर दी। इससे पहले सोनवानी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद थे, जहां से उन्हें अदालत में पेश किया गया।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई CGPSC भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया तथा प्रभावशाली और रसूखदार परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। CBI की जांच के आधार पर कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
ED किन बिंदुओं पर कर रही है जांच?
ED का कहना है कि प्रारंभिक जांच में भर्ती घोटाले से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रूप से प्राप्त धनराशि किस प्रकार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई गई, किन लोगों को इसका लाभ मिला और इस पूरे मामले में किन-किन व्यक्तियों की भूमिका रही। जांच का फोकस संदिग्ध बैंक लेनदेन, निवेश, अचल संपत्तियों और कथित आर्थिक लाभ के स्रोतों पर भी है।
CBI जांच में क्या आरोप सामने आए?
CBI द्वारा दायर आरोपपत्र में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा लोगों तक पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग कर कुछ अभ्यर्थियों को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस मामले में कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही दिया जाएगा।
आगे क्या?
31 जुलाई तक ED की रिमांड के दौरान टामन सिंह सोनवानी से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी भर्ती घोटाले से जुड़े कथित मनी ट्रेल, लेनदेन, निवेश और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या पूछताछ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई और जांच दोनों पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।
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