स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हेडलाइंस :
- एफएमजी छात्रों की अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए दूसरा चरण शुरू
- 9 जून तक कॉलेज चयन की प्रक्रिया जारी
- पहले चरण में 140 छात्रों ने लिया प्रवेश
- 1089 में से 949 इंटर्नशिप सीटें अभी भी रिक्त
- इंटर्नशिप पूरी होने के बाद मिलेगा स्थायी चिकित्सा पंजीयन
रायपुर। विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (एफएमजी) छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए दूसरे राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र छात्र 9 जून तक अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेजों का चयन कर च्वाइस फिलिंग कर सकेंगे। विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार दूसरे चरण में रिक्त सीटों पर आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पहले राउंड के बाद भी अधिकांश सीटें खाली
पहले चरण की काउंसिलिंग में 142 छात्रों को इंटर्नशिप सीटें आवंटित की गई थीं, जिनमें से 140 छात्रों ने प्रवेश लेकर अपनी सीट सुनिश्चित कर ली। इसके बावजूद प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध 1089 इंटर्नशिप सीटों में से 949 सीटें अभी भी खाली हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग का मानना है कि दूसरे चरण के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह सकती हैं।
एफएमजीई परीक्षा की कम सफलता दर बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार सीटें खाली रहने का प्रमुख कारण फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) में कम सफलता दर है। यह परीक्षा विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त छात्रों के लिए भारत में चिकित्सा अभ्यास का अनिवार्य प्रवेश द्वार मानी जाती है। आमतौर पर इस परीक्षा का सफलता प्रतिशत 12 से 22 प्रतिशत के बीच रहता है। यही कारण है कि विदेश में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र इंटर्नशिप के लिए पात्र नहीं बन पाते।
एक वर्ष की इंटर्नशिप के बाद मिलेगा स्थायी पंजीयन
एफएमजीई उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को भारत में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद वे छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन के पात्र बन जाते हैं। इसके बाद उन्हें सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सक के रूप में कार्य करने तथा स्वतंत्र चिकित्सा अभ्यास करने की अनुमति मिलती है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार विदेश में इंटर्नशिप पूरी कर चुके छात्रों को भी भारत में एक वर्ष की इंटर्नशिप करना अनिवार्य है।
इंटर्नशिप के दौरान मिलेगा स्टाइपेंड
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार एफएमजी छात्रों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान भारतीय एमबीबीएस छात्रों के समान प्रति माह 15,600 रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाता है। इससे छात्रों को प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता मिलती है और उन्हें व्यावहारिक चिकित्सा अनुभव प्राप्त होता है।
निजी मेडिकल कॉलेजों पर लगे अतिरिक्त शुल्क वसूली के आरोप
कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों पर एफएमजी छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के आरोप भी सामने आए हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि कुछ संस्थान इंटर्नशिप के नाम पर अतिरिक्त राशि लेकर उसी से स्टाइपेंड का भुगतान कर रहे हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह नियमानुसार गंभीर अनियमितता मानी जाएगी। हालांकि अधिकांश छात्र अपनी इंटर्नशिप प्रभावित होने की आशंका के कारण खुलकर शिकायत करने से बच रहे हैं।
प्रदेश में बढ़ सकती हैं मेडिकल सीटें
छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में एमबीबीएस की लगभग 2330 सीटें उपलब्ध हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार इस वर्ष पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक निजी मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है। इन संस्थानों के शुरू होने के बाद प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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