रायपुर / छत्तीसगढ़
भर्ती घोटाले की जांच में तेज हुई कार्रवाई, दस्तावेजों और साक्ष्यों की तलाश में सीबीआई टीम ने की छानबीन
हेडलाइंस :
- सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई की कार्रवाई तेज
- पूर्व पीएससी सचिव जीवन किशोर ध्रुव के निवास पर पहुंची जांच टीम
- चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच के तहत जुटाए जा रहे साक्ष्य
- घोटाले में पहले भी कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
- मामले में सीबीआई की चार्जशीट के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ा
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में कार्रवाई तेज करते हुए पूर्व पीएससी सचिव जीवन किशोर ध्रुव के निवास पर दबिश दी है। जांच एजेंसी की टीम ने दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर बहुचर्चित पीएससी भर्ती घोटाला सुर्खियों में आ गया है।
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच जारी
सीबीआई की जांच का केंद्र वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के परिजनों तथा करीबी अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इसी मामले में पूर्व अध्यक्ष, अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ विभिन्न चरणों में कार्रवाई की जा चुकी है।
पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
मामले की जांच के दौरान सीबीआई पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित सुमित ध्रुव सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां हुई थीं, जिनकी कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं।
चार्जशीट में कई बड़े नाम शामिल
इस मामले में सीबीआई पहले ही अंतिम चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कई अधिकारियों, अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों में चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर और पक्षपात के आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया है।
युवाओं की नजरें जांच के अंतिम निष्कर्ष पर
छत्तीसगढ़ के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों की नजरें अब इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। पीएससी भर्ती घोटाले को राज्य के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में से एक माना जा रहा है। अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो तथा भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
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