स्वतंत्र छत्तीसगढ़
अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक और तेज बनाने के उद्देश्य से 65 लाख रुपये की आधुनिक फॉरेंसिक वैन जिले को मिली सौगात
हेडलाइंस
- केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल पर छत्तीसगढ़ के जिलों को मिल रही मोबाइल फॉरेंसिक वैन
- मुंगेली जिले को मिली 65 लाख रुपये लागत की अत्याधुनिक वैन
- उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यशाला में वर्चुअली हुए शामिल
- पुलिस अधिकारियों को वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य संकलन का दिया गया प्रशिक्षण
- अपराध अनुसंधान और निष्पक्ष न्याय प्रणाली को मिलेगी मजबूती
रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है। इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका को लेकर मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए और हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को सेवा के लिए रवाना किया।

अपराध जांच प्रणाली को मिलेगी नई मजबूती
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
वैज्ञानिक जांच में तकनीक निभाएगी अहम भूमिका
बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित और वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण साबित होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का प्रभावी उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी और जांच प्रक्रिया को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।
निष्पक्ष न्याय के लिए उपयोगी साबित होगी वैन
मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय समान है और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन घटनास्थल पर साक्ष्यों के वैज्ञानिक परीक्षण और सुरक्षित संकलन में पुलिस की बड़ी मदद करेगी।
पुलिस अधिकारियों को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक विशेषज्ञ ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने, उन्हें सुरक्षित रखने और प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने की प्रक्रियाओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। साथ ही अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई।
ऑनलाइन सहभागिता से बचत संदेश को मिला बढ़ावा
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव और बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। इसे सरकारी खर्च में बचत और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
अधिकारियों और अधिवक्ताओं की रही मौजूदगी
कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, बार काउंसिल अध्यक्ष राजमन सिंह तथा वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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