नई शिक्षा नीति देश के नव निहालों को नवनिर्माण की नई राह दिखाएगी: बृजमोहन अग्रवाल

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रायपुर / छत्तीसगढ़ / नई दिल्ली

दिल्ली में आयोजित 18वीं नेशनल एजुकेशन लीडरशिप एंड स्किल डेवलपमेंट समिट 2026 में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा जगत में योगदान देने वाली संस्थाओं और हस्तियों को सम्मानित किया।

हेडलाइन्स

  • • नई शिक्षा नीति को बताया युवाओं के कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने वाला कदम। • वंचित और सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर दिया विशेष जोर। • शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं और संगठनों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की वकालत।

नई दिल्ली। रायपुर सांसद और छत्तीसगढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति देश के नव निहालों को नवनिर्माण की नई राह दिखाने का काम करेगी। वे दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित 18वीं नेशनल एजुकेशन लीडरशिप एंड स्किल डेवलपमेंट समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा जगत में सक्रिय संस्थाओं और हस्तियों को सम्मानित भी किया।

रट्टा प्रणाली से आगे बढ़कर कौशल आधारित शिक्षा पर जोर

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने केवल रटकर सीखने वाली पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए कौशल विकास, नवाचार और रोजगारोन्मुख शिक्षा को प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार अब भारतीय शिक्षा प्रणाली का ध्यान उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने, स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और नई सोच विकसित करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 देश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सुदूर क्षेत्रों के शैक्षिक विकास पर विशेष ध्यान जरूरी

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के सुदूर और वंचित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के दूरस्थ इलाकों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां शिक्षा के अवसरों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं पहुंचेगी, तब तक समग्र विकास संभव नहीं होगा।

समान अवसर के लिए संस्थाओं को संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत अभावग्रस्त संस्थाओं और गैरसरकारी संगठनों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से ही हर बच्चे को शिक्षा का समान अवसर मिल सकेगा। उन्होंने विकसित भारत शिक्षा अभियान की थीम को इसी दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए सभी हितधारकों से शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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