रायपुर / छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूरी संहिता नियम 2026 में संशोधन की मांग करते हुए सरकार को सौंपा विस्तृत प्रस्ताव
हेडलाइंस
- अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार करने की मांग की
- मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम 2026 के प्रारूप पर भेजे गए सुझाव
- आवास, शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल सुविधा खर्च बढ़ाने का प्रस्ताव
- प्रदेश के 5 लाख से अधिक कर्मचारी होंगे प्रभावित
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम 2026 के प्रारूप को लेकर श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को विस्तृत सुझाव प्रेषित किए हैं। संगठन ने छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित अधिसूचना के संदर्भ में यह प्रस्ताव भेजते हुए कहा है कि राज्य के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी नियमों में व्यापक संशोधन आवश्यक है। फेडरेशन के अनुसार प्रदेश के 5 लाख से अधिक कर्मचारी इस नियम से प्रभावित होंगे।
न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार करने की मांग
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष Gopal Prasad Sahu ने बताया कि संगठन ने न्यूनतम मूल वेतन कम से कम 30 हजार रुपये निर्धारित करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही नियम 3 के तहत आवासीय किराया व्यय को भोजन और वस्त्र व्यय के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की मांग की गई है। वहीं बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक खर्चों में मोबाइल संचार सुविधा को शामिल करते हुए 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों को तकनीकी समिति में शामिल करने की मांग
फेडरेशन ने नियम 4 के तहत शासकीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भी शामिल करने तथा तकनीकी समिति में कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों को स्थान देने की मांग की है। संगठन ने अध्याय-3 के अंतर्गत मजदूरी भुगतान से संबंधित धारा 16 और 17 को भी शामिल करने का सुझाव श्रम विभाग को भेजा है। प्रदेश उपाध्यक्ष युगल किशोर साहू ने कहा कि वर्ष 2017 में पुनरीक्षित न्यूनतम मूल वेतन 7800 से 10530 रुपये तक निर्धारित किया गया था, जो वर्तमान महंगाई के अनुसार बेहद कम है।
समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग तेज
फेडरेशन के पदाधिकारी आशीष कुमार तनेजा , राजकुमार साहू और राजकुमार सिंह ने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप अनियमित कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गजेन्द्र ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शासन की कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा।
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