छत्तीसगढ़ / रायपुर
हाइलाइट बॉक्स:
- 8 ठिकानों पर एक साथ ईडी की कार्रवाई
- 66.9 लाख रुपये नकद और 37.13 किलो चांदी जब्त
- मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताओं के आरोप
- 500 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका
रायपुर : भारत के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना से जुड़े छत्तीसगढ़ घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की है। रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद सहित कुल 8 स्थानों पर एक साथ दबिश दी गई। इस कार्रवाई में जमीन कारोबारी गोपाल गांधी, उनके भाई, पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर और राइस मिलर रौशन चंद्राकर से जुड़े परिसरों को खंगाला गया। एजेंसी को पहले से शिकायत मिली थी कि भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में गंभीर गड़बड़ियां की गई हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच तेज
ईडी इस मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से कर रही है। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने करीब 66.9 लाख रुपये नकद और 37.13 किलो चांदी जब्त की, जिसमें चांदी की सिल्लियां भी शामिल हैं। इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—लैपटॉप, मोबाइल और हार्ड डिस्क—भी जब्त किए गए हैं। इन डिवाइसों से लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है, जो पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकते हैं।
भूपेंद्र चंद्राकर के घर घंटों चली जांच
भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू होकर देर रात तक चली। करीब 15 घंटे चली इस जांच के दौरान टीम ने जमीन से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन और 8-9 लाख रुपये नकद बरामद किए। इसी तरह कुरुद में रौशन चंद्राकर के यहां भी लंबी तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की गहन जांच से कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
भूमि अधिग्रहण में बड़े खेल के संकेत
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। आरोप है कि कृषि भूमि को पिछली तारीखों में गैर-कृषि घोषित कर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। साथ ही एक ही खसरा नंबर की जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर विभिन्न नामों पर भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाई
ईडी इससे पहले भी इस मामले में कई जिलों में छापेमारी कर चुकी है और करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है। मौजूदा कार्रवाई के बाद जांच और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस कथित 500 करोड़ रुपये के घोटाले की परतें और खुलेंगी।
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