स्वतंत्र छत्तीसगढ़
🔶 हाइलाइट बॉक्स:
- “गो सम्मान आह्वान अभियान” के तहत विशाल प्रार्थना यात्रा का आयोजन
- 21,200 श्रद्धालुओं ने संकल्प पत्र लेकर नंगे पांव यात्रा में लिया भाग
- देशभर में 5000+ तहसीलों में एक साथ सौंपे गए ज्ञापन
- गोवंश संरक्षण और “राष्ट्र माता” का दर्जा देने की प्रमुख मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “गो सम्मान आह्वान अभियान” के तहत संत समाज, गो सेवकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा एक भव्य एवं शांतिपूर्ण प्रार्थना यात्रा निकाली गई। यह यात्रा माँ महामाया मंदिर से प्रारंभ हुई, जहाँ संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अभियान का शुभारंभ किया। लगभग 21,200 लोगों द्वारा संकल्पित पत्रकों को लाल वस्त्र में सिर पर धारण कर नंगे पांव पैदल यात्रा में शामिल होना इस आयोजन की विशेषता रही।
भजन-कीर्तन के साथ जनजागरण का संदेश
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए जनमानस को गोवंश संरक्षण के प्रति जागरूक किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संरक्षक दादा ठाकुर राम गुलाम सिंह ने भी अभियान को समर्थन दिया। संतों ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य समाज में आस्था, सेवा और संरक्षण की भावना को मजबूत करना है। यात्रा में गो सेवक आदेश सोनी सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, व्यापारी, एनजीओ प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हुए।
मोतीबाग में प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
यात्रा मोतीबाग गार्डन पहुंचकर समाप्त हुई, जहां तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम संबोधित था, जिसमें गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और गो माता को “राष्ट्र माता” का दर्जा देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। साथ ही कृषि, पर्यावरण संतुलन और भारतीय संस्कृति में गोवंश की भूमिका को देखते हुए ठोस नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया गया।
देशभर में एक साथ हुआ अभियान का विस्तार
संतों के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 को पूरे देश में एक साथ 5000 से अधिक तहसीलों में यह अभियान चलाया गया। छत्तीसगढ़ के 33 जिलों की 229 तहसीलों में भी समानांतर रूप से ज्ञापन सौंपे गए। रायपुर में सुबह 10 बजे से शुरू हुई यह यात्रा जनसहभागिता का बड़ा उदाहरण बनी, जहां हजारों लोगों की उपस्थिति ने अभियान को व्यापक समर्थन दिया।
श्रद्धा और सहयोग से चल रहा जनआंदोलन
संत समाज ने बताया कि “गो सम्मान आह्वान अभियान” किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साधु-संतों के मार्गदर्शन में समाज के हर वर्ग के सहयोग से संचालित हो रहा है। इसमें गो सेवक-सेविकाएं, गो पालक, प्रकृति प्रेमी और आम नागरिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य विरोध नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन और प्रार्थना के माध्यम से समाज और शासन तक अपनी भावनाएं पहुंचाना है।
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