बालोद / छत्तीसगढ़
हाइलाइट :
• कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी साहू का ISRO ‘युविका-2026’ में चयन
• छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान, ऑल इंडिया रैंक 112
• कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने किया सम्मानित
• पढ़ाई के साथ खेल और सामाजिक गतिविधियों में भी अव्वल
बालोद : बालोद जिले के स्वामी आत्मानंद विद्यालय कन्नेवाड़ा की कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी साहू ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर एक नई मिसाल कायम की है। उनका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रतिष्ठित ‘यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम (युविका-2026)’ के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली है। हिमांशी की इस सफलता से बालोद में खुशी और प्रेरणा का माहौल देखने को मिल रहा है।
सम्मान समारोह में बढ़ाया हौसला
सोमवार को आयोजित एक विशेष समारोह में बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने हिमांशी साहू को प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि हिमांशी की सफलता जिले के अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन हिमांशी ने अपनी मेहनत से यह कर दिखाया है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा में हासिल की बड़ी सफलता
हिमांशी ने इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए ओलंपियाड परीक्षा के माध्यम से आवेदन किया था। करीब साढ़े पांच लाख छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा में उन्होंने छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान हासिल किया और ऑल इंडिया स्तर पर 112वीं रैंक प्राप्त की। यह उपलब्धि उनकी लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
बहुमुखी प्रतिभा बनी सफलता की कुंजी
पढ़ाई के साथ-साथ हिमांशी खेलकूद में भी सक्रिय हैं। ताइक्वॉंडो में स्टेट लेवल उपलब्धि, साथ ही स्काउट गाइड और रेड क्रॉस के प्रमाण पत्र उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की बहुमुखी प्रतिभा ही ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में चयन के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है।
क्या है ISRO का ‘युविका’ कार्यक्रम
ISRO का ‘युवा विज्ञानी कार्यक्रम (YUVIKA) 2026’ कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए दो सप्ताह का पूर्णतः वित्तपोषित आवासीय ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और शोध के प्रति प्रेरित करना है, ताकि भविष्य में वे इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकें और देश के वैज्ञानिक विकास में योगदान दे सकें।
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