39.1 C
Raipur
Monday, April 20, 2026

संस्कृत केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा है: मोहन भागवत…

HomeNationalसंस्कृत केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा है: मोहन भागवत...

Date:

मुख्य बिंदु (Highlight Box):

  • दिल्ली में संस्कृत भारती कार्यालय उद्घाटन में बोले आरएसएस प्रमुख
  • संस्कृत को बताया भारत की “आत्मा” और सभ्यतागत आधार
  • बातचीत के माध्यम से भाषा सीखने पर दिया जोर
  • संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना, बढ़ती रुचि पर खुशी

संस्कृत की महत्ता पर भागवत का जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख Mohan Bhagwat ने सोमवार को संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे भारत की “आत्मा” बताया। दिल्ली में Sanskrit Bharati के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन परंपरा, विचार और जीवनशैली का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का अस्तित्व केवल भौगोलिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा के रूप में है।

भाषा सीखने का सरल तरीका: संवाद और अभ्यास

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए भागवत ने कहा कि बचपन में संस्कृत कठिन लगती थी, खासकर जब इसे केवल श्लोक याद करने तक सीमित कर दिया जाता था। लेकिन जब वही भाषा स्वाभाविक बातचीत में सुनी, तो वह सहज लगने लगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी भाषा को सीखने का सबसे प्रभावी तरीका है नियमित रूप से उसे सुनना और बोलना। पाठ्यपुस्तकों की बजाय व्यवहारिक संवाद भाषा सीखने को सरल और स्वाभाविक बनाता है।

संस्कृत के प्रति बढ़ती रुचि और सामाजिक बदलाव

कार्यक्रम में भागवत ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार में Sanskrit Bharati की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन ने कम समय में देशभर में संस्कृत के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। पिछले 15 वर्षों में समाज में संस्कृत को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है, जो इस भाषा के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

सांस्कृतिक पहचान और भाषा का संबंध

भागवत ने कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को भी संजोती है। संस्कृत के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दर्शन और जीवन मूल्यों को समझा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संस्कृत को अपनाकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें।

भविष्य की दिशा: संस्कृत का आधुनिक उपयोग

समारोह में यह भी बताया गया कि संस्कृत को आधुनिक संचार माध्यमों में शामिल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और शिक्षा के नए तरीकों के जरिए इस भाषा को जन-जन तक पहुंचाने की योजना है। भागवत ने विश्वास जताया कि यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो संस्कृत आने वाले समय में और अधिक प्रासंगिक और लोकप्रिय बन सकती है।

खबरे और भी…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई दिशा देगा राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का दौरा…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़ हाइलाइट्स बॉक्स 19 से 21 अप्रैल तक भारत...