स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क :
हाइलाइट्स :
- 1961 के पुराने कानून की जगह नया टैक्स सिस्टम लागू
- अब “फाइनेंशियल ईयर” और “असेसमेंट ईयर” की जगह सिर्फ “टैक्स ईयर”
- ITR-1 और ITR-2 की डेडलाइन 31 जुलाई, ITR-3 और ITR-4 के लिए 31 अगस्त
- F&O ट्रेडिंग महंगी, STT में बढ़ोतरी
- HRA क्लेम के नियम सख्त, PAN और किराया प्रमाण जरूरी
- फूड कार्ड, गिफ्ट और एजुकेशन अलाउंस में बढ़ी छूट
टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव: अब आसान होगा रिटर्न भरना
देशभर में आज से नया इनकम टैक्स कानून लागू हो गया है, जिसने 1961 के पुराने ढांचे को बदलते हुए टैक्स सिस्टम को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सबसे अहम बदलाव “टैक्स ईयर” की अवधारणा है, जिससे अब फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जटिलता खत्म हो जाएगी। साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समयसीमा में भी आंशिक बदलाव किया गया है, जहां ITR-1 और ITR-2 के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बरकरार है, जबकि ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तारीख 31 अगस्त कर दी गई है।
निवेश और छूट में बदलाव: आम आदमी और ट्रेडर्स पर असर
नए नियमों के तहत शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग महंगी हो गई है क्योंकि सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा HRA (हाउस रेंट अलाउंस) क्लेम करने के लिए अब मकान मालिक का PAN और किराए का प्रमाण देना अनिवार्य होगा, जिससे फर्जी क्लेम पर रोक लगेगी। कई नए शहरों को 50% HRA छूट वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है, जो किराएदारों के लिए राहत की खबर है। वहीं शेयर बायबैक पर अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगेगा, जिससे निवेशकों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
सैलरीड क्लास को राहत: बढ़ी टैक्स-फ्री सुविधाएं
सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कुछ राहत भरी खबरें भी हैं। फूड कार्ड पर टैक्स फ्री लिमिट को 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा गिफ्ट और वाउचर पर मिलने वाली छूट को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये सालाना कर दिया गया है। बच्चों के एजुकेशन और हॉस्टल अलाउंस में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
PAN नियम सख्त: बड़े लेनदेन पर निगरानी
सरकार ने टैक्स अनुपालन को मजबूत करने के लिए PAN नियमों को भी सख्त कर दिया है। अब बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए PAN अनिवार्य कर दिया गया है और केवल आधार के आधार पर PAN बनाना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही इनकम टैक्स फॉर्म्स के नामों में बदलाव किया गया है, हालांकि उनके कार्य में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया गया है। यह कदम टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें;


