नई दिल्ली / भारत
हाइलाइट :
- 200 से अधिक भारतीय छात्र ईरान-अजरबैजान सीमा पर फंसे
- ‘एग्जिट कोड’ की मांग से बढ़ी परेशानी
- कई छात्रों की फ्लाइट छूटी, परिवारों की चिंता बढ़ी
- विदेश मंत्रालय के सामने समन्वय की कमी का मुद्दा
सीमा पर अटकी वापसी, छात्रों की बढ़ी मुश्किलें
श्रीनगर समेत देशभर के सैकड़ों भारतीय छात्र इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच इन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अजरबैजान सीमा बंद होने से हालात जटिल हो गए हैं। ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी और तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के 200 से अधिक छात्र अस्तारा लैंड बॉर्डर चेकपॉइंट पर फंसे हुए हैं। इन छात्रों को सुरक्षा कारणों से बसों के जरिए बॉर्डर तक पहुंचाया गया था, लेकिन अब उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल रही है, जिससे उनकी घर वापसी अधर में लटक गई है।
‘एग्जिट कोड’ बना नई बाधा, समन्वय पर उठे सवाल
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMA) और जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) इस पूरे मामले को समन्वित करने में जुटे हैं। AIMA के अध्यक्ष डॉ. मोमिन खान के अनुसार, अजरबैजान के सीमा अधिकारी छात्रों से 16-अंकों का ‘एग्जिट कोड’ मांग रहे हैं, जो उनके पास नहीं है। भारतीय दूतावास ने पहले छात्रों को टिकट और वीजा बुक करने की सलाह दी थी, लेकिन अब सीमा पार न कर पाने से कई छात्रों की फ्लाइट्स छूट चुकी हैं। इस स्थिति ने भारतीय दूतावास और अजरबैजान अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है।
अब तक 640 भारतीय सुरक्षित निकले, लेकिन कई अब भी फंसे
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले सप्ताह से लगभग 640 भारतीय नागरिक आर्मीनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर निकल चुके हैं। हालांकि, कुछ छात्रों के मुताबिक 15 मार्च के बाद से सीमा पार करना लगभग बंद हो गया है। उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रों ने बताया कि शुरुआती बैच के निकलने के बाद से नए छात्रों को रोका जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में छात्र बॉर्डर पर ही रुकने को मजबूर हैं और उनकी यात्रा अनिश्चित बनी हुई है।
परिवारों में चिंता और आर्थिक बोझ बढ़ा
श्रीनगर में छात्रों के परिवार गहरी चिंता में हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि टिकट और वीजा पर लगभग 60,000 रुपये खर्च करने के बावजूद उनके बच्चों की फ्लाइट्स छूट गईं। एक अभिभावक नसीमा बानो ने कहा कि उनकी बेटी 13 मार्च से बॉर्डर पर फंसी है और अब दोबारा टिकट खरीदना संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव दोनों बढ़ा दिया है।
ठंड, बीमारी और पैनिक अटैक ने बढ़ाई मुश्किलें
छात्रों की स्थिति और भी चिंताजनक होती जा रही है। बॉर्डर पर ठंड के कारण कई छात्र बीमार पड़ रहे हैं, जबकि कुछ को पैनिक अटैक की शिकायत भी हुई है। एक अन्य अभिभावक आसिफा ने बताया कि उनके बेटे की 18 मार्च की फ्लाइट थी, लेकिन ‘एग्जिट कोड’ न होने के कारण वह भी फंस सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए और छात्रों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाए।
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