नई दिल्ली / रायपुर /छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• संसद में उठाया तकनीकी शिक्षा में फर्जी इंटर्नशिप का मुद्दा
• AICTE की इंटर्नशिप नीति में संरचनात्मक सुधार की मांग
• देश में फलते-फूलते ‘पे-फॉर-सर्टिफिकेट’ बाजार पर चिंता
• कॉलेजों में ‘इंटरनल इनोवेशन सेल’ बनाने का प्रस्ताव
तकनीकी शिक्षा में गंभीर विसंगति का मुद्दा संसद में उठा
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने देश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त एक गंभीर समस्या को संसद के पटल पर उठाते हुए केंद्र सरकार से ठोस और व्यापक सुधारों की मांग की है। संसद में नियम 377 के तहत सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग छात्रों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप की व्यवस्था वर्तमान में कई जगहों पर केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका कहना है कि देश के लगभग 5000 इंजीनियरिंग कॉलेजों में हर वर्ष करीब 15 लाख छात्र प्रवेश लेते हैं और एआईसीटीई के नियमों के अनुसार दूसरे, चौथे, छठे और सातवें सेमेस्टर के बाद औद्योगिक इंटर्नशिप अनिवार्य होती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर छात्रों को सही मार्गदर्शन और अवसर नहीं मिल पाते।
‘पे-फॉर-सर्टिफिकेट’ बाजार से कौशल विकास पर खतरा
सांसद अग्रवाल ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि कई कॉलेज छात्रों को वास्तविक इंटर्नशिप उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते, जिसका फायदा उठाकर कई बोगस कंपनियों ने “पे-फॉर-सर्टिफिकेट” का एक अवैध बाजार खड़ा कर लिया है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में छात्र केवल पैसे देकर इंटर्नशिप प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं, जबकि उन्हें वास्तविक कौशल प्रशिक्षण नहीं मिल रहा। हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के लगभग 46 प्रतिशत छात्रों ने केवल डिग्री की औपचारिकता पूरी करने के लिए निजी कंपनियों से पैसे देकर सर्टिफिकेट खरीदे हैं। उन्होंने इसे देश की बौद्धिक संपदा और इंजीनियरिंग के भविष्य के साथ गंभीर धोखा बताया।
कॉलेजों में ‘इंटरनल इनोवेशन सेल’ बनाने का सुझाव
इस समस्या के समाधान के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए कहा कि प्रत्येक इंजीनियरिंग कॉलेज में ‘इंटरनल इनोवेशन सेल’ स्थापित किए जाने चाहिए। इन सेल के माध्यम से छात्रों को कॉलेज परिसर में ही उद्योग जैसा वातावरण और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर दिया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे वे छात्र भी वास्तविक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे जिन्हें बाहर इंटर्नशिप मिलने में कठिनाई होती है। साथ ही उन्होंने फर्जी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट बेचने वाली संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
युवाओं के कौशल विकास और गुणवत्ता शिक्षा पर जोर
अग्रवाल ने कहा कि भारत के इंजीनियर केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि वे तकनीकी कौशल और व्यावहारिक अनुभव से भी सशक्त हों। उनका मानना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में समय रहते सुधार किए गए तो देश के लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल केवल शिक्षा सुधार नहीं बल्कि देश के कौशल विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने की पहल की सराहना
सांसद द्वारा संसद में उठाए गए इस मुद्दे की कई शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने सराहना की है। उनका मानना है कि यदि इंटर्नशिप व्यवस्था को पारदर्शी और कौशल आधारित बनाया जाता है तो इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सुधार न केवल छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाएंगे बल्कि उद्योगों को भी बेहतर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराएंगे।
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