स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• मिडिल ईस्ट संकट से वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव
• Donald Trump बोले—तेल महंगा होने से अमेरिका को आर्थिक लाभ
• International Energy Agency ने 40 करोड़ बैरल तेल आपात भंडार से जारी करने का फैसला
• होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक सप्लाई प्रभावित
मिडिल ईस्ट तनाव का वैश्विक तेल बाजार पर असर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और कई देशों में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि तेल की कीमतों में वृद्धि से अमेरिका को आर्थिक फायदा हो रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो इसका सीधा लाभ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मिलता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, क्योंकि इससे पूरे मध्य पूर्व और दुनिया की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता और आपात कदम
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए International Energy Agency (IEA) ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल आपूर्ति में बड़ी बाधा आ सकती है। इसी स्थिति से निपटने के लिए आईईए के 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है। यह कदम वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में अत्यधिक उछाल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। आईईए के अनुसार सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 1.2 अरब बैरल का रणनीतिक भंडार मौजूद है, जबकि उद्योगों के पास भी अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है जिसे आवश्यकता पड़ने पर उपयोग में लाया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईईए के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने सदस्य देशों की विशेष बैठक बुलाकर बाजार की स्थिति की समीक्षा की। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
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