देश-विदेश
हाइलाइट्स
- अमेरिकी-इजरायली हमलों में मृतकों की संख्या 1000 के पार
- सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की रिपोर्ट
- खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमले
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारत समेत दुनिया पर असर
- विदेश मंत्रालय अलर्ट, मिडिल ईस्ट में CBSE परीक्षाएं स्थगित
खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा टकराव
मिडिल ईस्ट में हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बीच ईरान में मरने वालों की संख्या 1000 के पार पहुंचने की खबर है। इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की रिपोर्ट ने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन इस खबर ने क्षेत्रीय तनाव को कई गुना बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सत्ता परिवर्तन औपचारिक रूप लेता है तो ईरान की रणनीति और अधिक आक्रामक हो सकती है।
खाड़ी देशों तक पहुंची जंग की लपटें
इजरायल और अमेरिका की ओर से जारी ताबड़तोड़ हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसने 27 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें खाड़ी क्षेत्र के सैन्य अड्डे शामिल हैं। दुबई, कुवैत सिटी, बहरीन, कतर और ओमान के आसमान में मिसाइल गतिविधियों की खबरों ने दहशत फैला दी है। शेयर बाजारों में गिरावट और कई व्यावसायिक गतिविधियों के ठप होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव दिख रहा है। इस बीच तेहरान के हजारों सीसीटीवी कैमरों के वर्षों से हैक होने और खामेनेई की गतिविधियों पर इजरायल की नजर होने के खुलासे ने सुरक्षा ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
व्हाइट हाउस की सख्ती और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस से जारी सख्त चेतावनियों ने संघर्ष की दिशा को और तीखा बना दिया है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि उसके ठिकानों या दूतावासों पर हमले जारी रहे तो और भी घातक कार्रवाई की जाएगी। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले और आगजनी की खबरों ने वैश्विक कूटनीति को झकझोर दिया है। इजरायल की थल सेना के लेबनान में घुसकर कई चौकियों पर कब्जे की सूचना भी क्षेत्रीय विस्तार की आशंका बढ़ा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस युद्ध का सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। भारत का विदेश मंत्रालय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। सुरक्षा कारणों से कई क्षेत्रों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा बाजार और शेयर बाजारों में अस्थिरता और गहरा सकती है।
आगे क्या?
मिडिल ईस्ट की यह जंग अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की परीक्षा बन चुकी है। कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात लगातार बदल रहे हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव पूर्ण युद्ध में बदलेगा या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव से कोई समाधान निकलेगा। फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील हैं और हर नया हमला तनाव को और भड़का रहा है।
ख़बरें और भी…


