राजिम / रायपुर/छत्तीसगढ़
मुख्य बिंदु:
- 1 फरवरी की हिंसा में कई घर आगजनी से क्षतिग्रस्त
- 13 मुस्लिम परिवारों को अब तक सरकारी सहायता न मिलने का आरोप
- आप ने सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश से न्यायिक जांच की मांग की
- पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू होने की पुष्टि की
पीड़ितों की स्थिति पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत दुतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि हिंसा के दौरान घरों में आग लगाए जाने से प्रभावित 13 मुस्लिम परिवारों को अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस राहत या मुआवजा नहीं मिला है। रायपुर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य उपाध्यक्ष एवं मानवाधिकार वकील प्रियंका शुक्ला ने कहा कि पार्टी के तथ्य-जांच दल ने 24 और 25 फरवरी को गांव का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की। उनके अनुसार कई परिवार वर्तमान में निजी सहायता पर निर्भर हैं और भोजन, कपड़े तथा अस्थायी आश्रय की व्यवस्था सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही है।
हमले के आरोप और चिकित्सा सहायता का मुद्दा
प्रेस वार्ता के दौरान कुछ पीड़ितों ने दावा किया कि हिंसा में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया, सामान लूटे गए तथा महिलाओं और लड़कियों को धमकियों व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पार्टी प्रवक्ता विजय झा ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में यौन उत्पीड़न के प्रयास भी हुए, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही संभव होगी। पीड़ित परिवारों का कहना है कि घायल पुरुषों को निजी व्यक्तियों की मदद से राजिम और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज का खर्च परिजनों और समर्थकों ने उठाया। पार्टी ने यह भी दावा किया कि घटना में सात पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें एक कांस्टेबल निजी अस्पताल में उपचाराधीन है।
पुलिस जांच और प्रशासन का रुख
इधर, पुलिस ने पुष्टि की है कि 1 फरवरी की घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं तथा घटनास्थल से प्रारंभिक साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं। घटना के बाद वायरल हुए वीडियो क्लिप, तस्वीरें और अन्य सामग्री की भी जांच की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आगजनी, मारपीट और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार सहित सभी आरोपों की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है और साक्ष्यों के आधार पर उचित धाराएं लागू की जाएंगी। प्रशासन ने गांव में कड़ी निगरानी बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव फैलाने के प्रयासों पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात कही है, ताकि सामान्य स्थिति शीघ्र बहाल हो सके और सभी समुदाय स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें।
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