महाराष्ट्र / भारत
हाइलाइट्स
- 70 वर्षों की इतिहास शिक्षा पर उठाए सवाल
- Aurangzeb को ‘नायक’ मानने की मानसिकता पर टिप्पणी
- Chhatrapati Shivaji Maharaj और Tipu Sultan की तुलना को बताया अनुचित
- शिक्षा नीति और हिंदी को तीसरी भाषा बनाए जाने पर विपक्ष पर निशाना
इतिहास की शिक्षा पर सवाल
महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि पिछले 70 वर्षों में स्कूलों में इतिहास को तथ्यों के साथ और संतुलित दृष्टिकोण से पढ़ाया गया होता, तो आज कोई भी औरंगजेब को नायक के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास लेखन और पाठ्यक्रम निर्माण में वैचारिक पक्षपात रहा है, जिसका असर नई पीढ़ी की सोच पर पड़ा है। उनके इस बयान के बाद सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
शिवाजी और टीपू की तुलना पर आपत्ति
फडणवीस ने विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुलतान की तुलना पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व स्वराज और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित था, जबकि टीपू सुलतान ने ब्रिटिश सत्ता से अपने राज्य की रक्षा के लिए युद्ध किया, लेकिन उनके शासनकाल में बड़ी संख्या में हिंदुओं और नायर समुदाय के लोगों की हत्या के आरोप भी इतिहास में दर्ज हैं। ऐसे में दोनों ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को समान परिप्रेक्ष्य में रखना उचित नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
भाषा नीति और राजनीतिक कटाक्ष
मुख्यमंत्री ने कक्षा एक से पांच तक हिंदी को तीसरी भाषा बनाने के फैसले पर हो रहे विरोध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लिया गया था, लेकिन इसका राजनीतिक ठीकरा मौजूदा सरकार पर फोड़ा जा रहा है। हल्के अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे ने कुछ राजनीतिक विरोधियों को एक मंच पर ला दिया है। विधानसभा में दिया गया यह भाषण अब राज्य की राजनीति में नई बहस का केंद्र बन गया है, जहां इतिहास, पहचान और शिक्षा नीति जैसे संवेदनशील विषय फिर से चर्चा में हैं।
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